सोमवार, 12 दिसंबर 2011

अभि‍व्‍यक्‍ति‍-२०११: नवगीत परि‍संवाद एवं वि‍मर्श

लखनऊ: २६ एवं २७ नवंबर २०११ को अभिव्यक्ति विश्वम् (http://www.abhivyakti-hindi.org/) के सभाकक्ष में आयोजित नवगीत परिसंवाद एवं विमर्श का सफल आयोजन हुआ। इस अवसर पर १८ चर्चित नवगीतकारों सहित नगर के जाने-माने साहित्यकार, अतिथि, वेब तथा मीडिया से जुड़े लोग, संगीतकार व कलाकार उपस्थित थे।
पहले दिन की सुबह कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ की बीएसएनल के जनरल मैनेजर श्री सुनील कुमार परिहार ने दीप प्रज्वलित कर किया। सरस्वती वंदना रश्मि चौधरी ने पंकज चौधरी की तबला संगत के साथ प्रस्तुत की। दो दिनों के इस कार्यक्रम में प्रतिदिन तीन-तीन सत्र हुए जिसमें अंतिम सत्र मनोरंजन, संगीत और कविता पाठ के रहे। नवगीतों पर आधारित पूर्णिमा वर्मन के फोटो कोलाज की प्रदर्शनी इस कार्यक्रम में आकर्षण का केन्द्र रही।
26 नवंबर का पहला सत्र समय से संवाद शीर्षक से था। इसमें विनय भदौरिया ने अपना शोधपत्र 'नवगीतों में राजनीति और व्यवस्था,' शैलेन्द्र शर्मा ने 'नवगीतों में महानगर,' रमाकांत ने नवगीतों में जनवाद, तथा निर्मल शुक्ल ने अपना शोधपत्र 'क्या नवगीत आज के समय से संवाद करने में सक्षम है 'पढ़ा। अंतिम वक्तव्य वरिष्ठ रचनाकार वीरेंद्र आस्तिक जी और माहेश्वर तिवारी जी ने दिया।
दूसरे सत्र का विषय था- 'नवगीत की पृष्ठभूमि कथ्य-तथ्य, आयाम और शक्ति।' इसमें अवनीश सिंह चौहान ने अपना शोध पत्र 'नवगीत कथ्य और तथ्य,' वीरेन्द्र आस्तिक ने 'नवगीत कितना सशक्त कितना अशक्त,' योगेन्द्र वर्मा ने 'नवगीत और युवा पीढ़ी' और माहेश्वर तिवारी ने 'नवगीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि' पढ़ा। अंतिम वक्तव्य डॉ ओमप्रकाश सिंह का रहा।
सायं चाय के बाद तीसरे सत्र में आनंद सम्राट के निर्देशन में शोमू, आनंद दीपक और रुचिका ने सुगम संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया। यह संगीत कार्यक्रम नवगीतों पर आधारित था। संगीत सम्राट आनंद का था तथा गायक थे रुचिका श्रीवास्तव और दीपक। गिटार और माउथ आर्गन पर संगत शोमू सर ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ गीतकार माहेश्वर तिवारी , कुमार रवीन्द्र एवं पूर्णिमा वर्मन जी के नवगीतों को प्रस्तुत किया गया। इसके बाद पूर्णिमा वर्मन जी ने अपनी पावर पाइंट प्रस्तुति दी जिसका विषय था- हिंदी की इंटरनेट यात्रा अभिव्यक्ति और अनुभूति के साथ नवगीत की पाठशाला, नवगीत और पूर्वाभास तक।
दूसरे दिन का पहला सत्र 'नवगीत वास्तु शिल्प और प्रतिमान विषय पर आधारित था।' इसमें जय चक्रवर्ती ने 'नवगीत का शिल्प विधान,' शीलेन्द्र सिंह चौहान ने 'नवगीत के प्रमुख तत्व', आनंद कुमार गौरव ने 'गीत का प्रांजल रूप है नवगीत,' डॉ ओम प्रकाश सिंह ने 'समकालीन नवगीत के विविध आयाम 'तथा मधुकर अष्ठाना ने 'नवगीत और उसकी चुनौतियां' विषय पर अपना वक्तव्य पढ़ा। अंतिम वक्तव्य वरिष्ठ रचनाकार मधुकर अष्ठाना जी और निर्मल शुक्ल जी ने दिया।
दूसरे सत्र का शीर्षक था- नवगीत और लोक संस्कृति'। इसमें डॉ. जगदीश व्योम ने 'लोकगीतों की संवेदना से प्रेरित नवगीत', श्याम नारायण श्रीवास्तव ने 'नवगीतों में लोक की भाषा के प्रयोग' तथा सत्येन्द्र तिवारी ने 'नवगीत में भारतीय संस्कृति' विषय पर अपना शोधपत्र पढ़ा। दोनो दिनों के इन चारों सत्रों में प्रश्नोत्तर तथा निष्कर्ष भी प्रस्तुत किये गए।
दूसरे दिन के अंतिम सत्र में कविता पाठ का कार्यक्रम था जिसमें उपस्थित रचनाकारों ने भाग लिया। कविता पाठ करने वाले रचनाकारों में थे- संध्या सिंह, राजेश शुक्ल, अवनीश सिंह चौहान, योगेन्द्र वर्मा व्योम, आनंद कुमार गौरव, विनय भदौरिया, रमाकान्त, जय चक्रवर्ती, सत्येन्द्र रघुवंशी, विजय कर्ण, डॉ. अमिता दुबे, शैलेन्द्र शर्मा, सत्येन्द्र तिवारी, श्याम श्रीवास्तव, शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान, डॉ. जगदीश व्योम, पूर्णिमा वर्मन, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, मधुकर अष्ठाना, निर्मल शुक्ल, वीरेन्द्र आस्तिक और माहेश्वर तिवारी। इस कार्यक्रम की आयोजक रहीं यशश्वी संपादिका पूर्णिमा वर्मन और संयोजक रहे प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. जगदीश 'व्योम' और अवनीश सिंह चौहान। आभार अभिव्यक्ति पूर्णिमा वर्मन ने की। धन्यवाद ज्ञापन के बाद सभी रचनाकारों को स्मृतिचिह्न प्रदान किये गए।
कार्यक्रम की अन्य तस्वीरें यहाँ क्लिक कर देखी जा सकती हैं-
https://picasaweb.google.com/108497653410225446378/November302011#5680777598452368194

रविवार, 4 दिसंबर 2011

साहि‍त्‍यि‍क सांस्‍कृति‍क कला संगम अकादमी, परि‍यावाँ में जनकवि‍ ‘आकुल’ और रघुनाथ मि‍श्र सम्‍मानि‍‍त

कोटा। 30 अक्टूबर को महाभारत के शि‍खर शांतनु, मृत्‍युंजय भीष्म और मत्स्‍यगंधा की जन्मभूमि‍ परि‍यावाँ में जो उत्तरप्रदेश के प्रातापगढ़ जि‍ले से 60 कि‍मी0 और प्रख्यात संत कृपालुजी महाराज की जन्मभूमि‍ मनगढ़ के समीप ही ग्रामीण अंचल की मनोहारी भरतभूमि‍ परि‍यावाँ में एक महान् वटवृक्ष के नीचे सादे समारोह में महामना मदनमोहन मालवीय पोषि‍त साहि‍त्यिक संस्थान ‘साहि‍त्यि‍क सांस्कृति‍क कला संगम अकादमी’द्वारा आयोजि‍त सम्मान समारोह में लगभग 80 साहि‍त्यकारों को सम्मानि‍त कि‍या गया। इस समारोह में अन्‍य संस्था‍नों यथा तारि‍का वि‍चार मंच इलाहाबाद और भारतीय वांग्मय पीठ कोलकाता द्वारा भी साहि‍त्यकारों को सम्मानि‍त कि‍या गया। अकादमी के सचि‍व श्री वृन्दायवन त्रि‍पाठी रत्नेश यह जि‍म्मेदारी 1980 से सम्हा‍ल रहे हैं और प्रति‍वर्ष यह समारोह आयोजि‍त हो रहा है, जि‍समें अभी तक 500 से भी अधि‍क साहि‍त्‍यकारों को सम्मा‍नि‍त कि‍या जा चुका है। 16 प्रान्तों से पधारे साहि‍त्यकार भारत की भाषाई एकता को एक सूत्र में पि‍रो कर सभी भेदभावों को भुला कर एक मंच के नीचे इकट्ठा हुए। इस वर्ष भी परि‍यावाँ में सभी पधारे साहि‍त्यकारों, कवि‍यों, कलाकारों को सम्मानि‍त कि‍या गया। अकादमी की ओर से यह समारोह 30वें भाषाई एकता सम्मेलन के रूप में आयोजि‍त कि‍या गया।
प्रथम सत्र में माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्‍वलन के पश्चात् भाषाई एकता पर व्याख्यांन माला का शुभारम्भ कि‍या गया। समारोह की अध्यक्षता भारतीय वांगमय पीठ कोलकाता के सचि‍व श्री श्यामलाल उपाध्याय थे और कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात साहि‍त्यकार बज-बज, कोलकाता से पधारे डॉ0 कुँवर वीर सि‍ह मार्तण्ड थे। कार्यक्रम में कोलकाता के सत्यनारायण सिंह आलोक, इम्‍फाल से श्री हुइरोम गुणीन्द्र सिंह लैकाई, वि‍जय कुमार शर्मा, मेरठ, इगलास के गाफि‍ल स्वामी, कोटा के श्री रघुनाथ मि‍श्र, संचालक श्री मार्तण्ड, अध्यक्ष श्री उपाध्याय और कई वि‍द्वानों ने भाषाई एकता पर अपने वि‍चार प्रकट कि‍ये। सभी ने एक मत हो कर कहा कि‍ संवि‍धान की अनुसूचि‍यों की भाषाओं को, राजभाषा हि‍न्दी को राष्ट्रमभाषा के रूप में पहचान बनाने के लि‍ए पहल करनी होगी। आज हि‍न्दी वि‍श्व के अनेकों वि‍श्ववि‍द्यालयों में पढ़ाई जा रही है, क्योंकि‍ व्या‍वसायि‍क दृष्टि‍ से भारतीय बाजार में पैठ बनाने के लि‍ए भारतीयों को अपना जुड़ाव पैदा करने के लि‍ए हि‍न्दी का समृद्ध होना अति‍ आवश्ययक है। दूसरे सत्र में वि‍भि‍न्ऩ सम्मानों को प्रदान कि‍या गया। समारोह में हि‍न्दी सेवा सम्मान, वि‍वेकानन्दज सम्मान, वि‍द्या वाचस्पति‍ मानद उपाधि‍, वि‍द्या वारि‍धि‍ मानद उपाधि‍, कला मार्तण्ड, हि‍न्दी गरि‍मा सम्मान,कबीर सम्मान आदि‍ प्रदान कि‍ये गये। राजस्थान से कोटा के जनकवि‍ आकुल को वि‍वेकानन्द सम्मान, श्री मि‍श्र को वि‍द्या वाचस्पति‍ की मानद उपाधि‍, रावतसर के श्री मुखराम माकड़ को सुश्री सरस्वती सिंह सुमन स्मृति‍ सम्मान, रावतभाटा से, भवानी मण्डी से राजेश कुमार शर्मा पुरोहि‍त को वि‍द्या वारि‍धि‍ मानद उपाधि‍ और अलवर के श्री सुमि‍त कुमार जैन को साहि‍त्य महोपाध्याय मानद उपाधि‍ से सम्मा‍नि‍त कि‍या गया। अन्य वि‍भूति‍यों में कोलकाता के श्री श्यामलाल उपाध्याय को साहि‍त्य महोपाध्याय, श्री अशोक पाण्डेय गुलशन को पं0 जगदीश नारायण त्रि‍पाठी स्मृति‍ सम्मान, सत्यनारायण सिंह आलोक, फ़ख़्रे आलम खाँ, मेरठ, सुश्री आशा मि‍श्रा, दति‍या, मनोज कुमार वार्ष्णेय मेरठ आदि‍ को वि‍द्या वाचस्पति‍ मानद उपाधि‍, बि‍जनौर के मनोज अबोध, गोरखपुर के अशोक कुमार नि‍र्मल, अवधेश शुक्ल, सीतापुर, पूनम शर्मा, जबलपुर आदि‍ को वि‍द्या वारि‍धि‍ की मानद उपाधि‍, सुरेश प्रकाश शुक्ल, लखनऊ, सुश्री सीमा गुप्ता, अलवर और पि‍थौरागढ़ की सुश्री शारदा वि‍दुषी को वि‍वेकानन्द सम्‍मान प्रदान कि‍या गया। मनोज कुमार वार्ष्णेय, मेरठ को पत्रकार मार्तण्ड पुरस्कार भी प्रदान कि‍या गया।
अकादमी के इस सम्मान समारोह की सहयोगी संस्थाओं तारि‍का वि‍चार मंच, इलाहाबाद और भारतीय वांगमय पीठ, कोलकाता ने अनेकों साहि‍त्यकारों को सम्मानि‍त कि‍या। वांग्मय पीठ कोलकाता द्वारा अन्‍य साहि‍त्‍यकारों के साथ आकुल व श्री रघुनाथ मि‍श्र को भी कवि‍ गुरु रवीन्द्र नाथ ठाकुर सारस्व‍त साहि‍त्य सम्मान प्रदान कि‍या गया। तारि‍का वि‍चार मंच ने श्री मि‍श्र को पं0 रामकुमार वर्मा सम्‍मान से सम्मानि‍त कि‍या। दूसरे दि‍न श्री मार्तण्ड, श्रीमि‍श्र, आकुल, श्री आलोक और श्री अकेला ने मनगढ़ स्थि्‍त जगद्गुरु कृपालुजी महाराज के आश्रम जाकर प्रख्यात राधाकृष्ण मंदि‍र देखा और कृपालुजी महाराज के दर्शन कि‍ये, उनके जीवन दर्शन की चि‍त्रमय झांकी देखी और उनका योग आश्रम देखा।

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

अरुण श्रीवास्तव ‘मुन्ना जी’ नहीं रहे

हम सब साथ साथ के सहयोगी प्रकाशन, झांसी से प्रकाशित होने वाली कायस्थ समाज की लोकप्रिय ‘चित्रांश ज्योति’के संस्थापक व प्रकाशक झांसी निवासी श्री अरुण श्रीवास्तव ‘मुन्ना जी’ का गत् 5 अक्तूबर, 2011 को लखनऊ स्थित मेडिकल कालेज में एक बीमारी के चलते आकस्मिक निधन हो गया। वह 52 वर्ष के थे। अपने पीछे वह पत्नी सहित दो नाबालिग बच्चे छोड़ गए हैं। आप लगभग तीन दशकों तक दैनिक जागरण, झांसी के संपादकीय विभाग में कार्य करते हुए बतौर लेखक मुख्यतः70-90 के दशक में रेडियो के अलावा दैनिक जागरण सहित धर्मयुग, लोटपोट, बाल भारती, दीवाना तेज, पराग, फिल्मी दुनिया, माधुरी आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे थे। विभिन्न पत्र/पत्रिकाओं में प्रकाशित ‘आपके अटपटे प्रश्न और मुन्नाजी के चटपटे उत्तर’ आपका लोकप्रिय स्तंभ रहा था। इस स्तंभ के अंतर्गत पाठकों के अटपटे प्रश्नों के जवाब में आपके चटपटे व काव्यात्मक उत्तर उस समय बेहद लोकप्रिय रहे थे। आपने किशोरावस्था में ही लेखन व पत्रकारिता शुरू कर दी थी और उसी समय ‘मृगपाल’ नामक एक मासिक पत्रिका का संपादन भी प्रारम्भ कर दिया था। आपको लेखन व पत्रकारिता के अलावा गायन व समाज सेवा का भी शौक था। आपने झांसी जिले में कायस्थ समाज के उत्थान के लिए भी अनेक कार्यक्रम आयोजित किए और अंतिम समय तक कायस्थ समाज की पात्रिका ‘चित्रांश ज्योति’ का प्रकाशन भी करते रहे। आपको विभिन्न उल्लेखनीय कार्यों के चलते अनेक सम्मान भी प्राप्त थे। आप अत्यन्त मिलनसार व सामाजिक प्रकृति के व्यक्ति थे। आपके आकस्मिक निधन से आपके हजारों चाहने वाले दुखी व स्तब्ध हैं।

गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

शब्‍द दो तुम मैं लि‍खूँगा

आज आक्रोश दि‍न पर दि‍न बढ़ रहा है। बात काश्‍मीर की हो या भ्रष्‍टाचार की,जन समस्‍याओं की हो या महँगाई की,राजनीति‍ की हो या साहि‍त्‍य की,आम आदमी इतना त्रस्‍त हो चला है कि‍ धैर्य छूटने लगा है,हाथ में जलजले उठाने को तैयार है वह,आँखों में वहशत को देख कर लगता है कि‍ भवि‍ष्‍य में कुछ अनि‍ष्‍ट होने वाला है,न्‍यायाधीश बेबस अपने नि‍र्णयों की धज्‍जि‍याँ उड़ते देख रहे हैं,कि‍स का गुस्‍सा कि‍स पर उतर रहा है,नगरपालि‍काओं में मूलभूत आवश्‍यकताओं के लि‍ए लोग सड़कों पर उतरने लगे हैं, हिंसक प्रवृत्‍ति‍याँ बढ़ रही हैं, रक्षक भक्षक बन रहे हैं, भ्रष्‍ट लोग अब जैसे एक ही दि‍न में पूरी देश को लूट कर भागने की फ़ि‍राक़ में हैं, गुण्‍डागर्दी हद कर रही है, उत्‍तर प्रदेश में तानाशाही फ़लक़ पर है, संवि‍धान के मूल अधि‍कार केवल कागज़ों में मुँह छि‍पा रहे हैं। क्‍या इसी को रौरव कहते हैं, पुराणों में वर्णि‍त एक नर्क। पूरे देश पर धीरे धीरे एक अभेद्य वायरस का जमावड़ा होने लगा है, याद आ रहा है अंग्रेजी फि‍ल्‍म 'इनडि‍पेंडेंस डे' जि‍समें दूसरे ग्रह के प्राणि‍यों ने अमेरि‍का पर अपना जाल फैलाया और कि‍स तरह से जाँबाज़्रों ने देश को फि‍र एक आज़ादी में हवा लेने के लि‍ए अपनी जाँ की बाज़ी लगाई। आज अपने देश में फि‍र एक जनक्रांति‍ की आवश्‍यकता महसूस की जा रही है, पर इसके पहले और कि‍तना रक्‍तपात--- यह आप और हमें सोचना है।

शब्द दो तुम मैं लि‍खूँगा, इक अमि‍ट इति‍हास फि‍र।
याद रक्खेगा तुम्हें अपना वतन हर साँस फि‍र।।
कब तलक सोते रहोगे,वक्त की आवाज़ है।
साहि‍लों की मौज़ों में तूफानों का अंदाज़ है।
कर दो तुम नाकाम उन शैतानों की हर कोशि‍शें।
कर दो तुम ख़ाति‍र वतन, क़ुर्बान अब हर ख्‍वाहि‍शें।
खूँरेज़ी का दौर है, दुश्मन नहीं कमज़ोर है।
बि‍जलि‍यों का शोर है, ग़म की घटा घनघोर है।
अपनी हर तकलीफ़ को मोहरा बना कर कि‍श्त दी।
उसको ना मुँह की पड़े, जो तुमने ना शि‍कस्त दी।
फि‍र बढ़ेगा हौसला, दुश्मन का तुम ये जान लो।
फि‍र लि‍खेगा खून से लथपथ कहानी जान लो।
हाथ दो उड़ने को दूँगा मैं नई परवाज़ फि‍र।
याद रक्खेगा तुम्हें अपना वतन हर साँस फि‍र।।

सान्निध्य: वि‍श्‍व दृष्‍टि‍ दि‍वस

सान्निध्य: वि‍श्‍व दृष्‍टि‍ दि‍वस: बचें दृष्टि से दृष्टि‍‍दोष संकट फैला है चहुँ दि‍श। नि‍कट, दूर या सूक्ष्म दृष्टि‍ सिंहावलोकन हो चहुँ दिश।। दृष्टि‍ लगे या दृष्टि पड़े जब डि‍...

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

सान्निध्य: कितने रावण मारे अब तक

सान्निध्य: कितने रावण मारे अब तक: कितने रावण मारे अब तक कितने कल संहारे मन के भीतर बैठे रावण को ना मार सका रे तेरी अंतरात्मा षड् रिपु में पड़ी हुई है इसीलिए यह धारा रावणों से...

शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

सान्निध्य: दशहरा

सान्निध्य: दशहरा: सुनहुँ राम वानर सेना संग सीमा में घुस आये। घोर नि‍नाद देख चहुँदि‍स सेना नायक घबराये।। कुंभकरण संग मेघनाद समरांगण स्‍वर्ग सि‍धारे। बलशाली से...

बुधवार, 28 सितंबर 2011

शक्ति की अधि‍ष्‍ठात्री देवी माँ दुर्गा

आश्विन शुक्ल दशमी मास के शुक्ल पक्ष के शुरुआती नौ दि‍न भारतीय संस्कृति‍ में नवरात्र के नाम से शक्ति‍ की पूजा के लि‍ए नि‍र्धारि‍त है
इन दि‍नों शक्ति ‍की अधि‍ष्ठात्री देवी माता दुर्गा की आराधना, उपासना व अर्चना की जाती है। 1- शैलपुत्री 2- ब्रह्मचारि‍णी 3-चंद्रघंटा 4-कूष्मादण्डा 5-स्कन्दमाता 6- कात्यायनी 7- कालरात्रि‍ 8- महागौरी 9- सि‍द्धि‍दात्री। ये नौ रूप दुर्गा के ही अन्य प्रतीक हैं, जो शक्‍ति‍ ‍ के सशक्त संबल हैं। दुर्गा का अर्थ ही है-दुर्गम, कठि‍नता से प्राप्ति के योग्य शक्ति‍।
दुर्गा के आठ हाथों में से सात हाथों में शक्ति के प्रतीक चि‍ह्न हैं। शंख, चक्र, गदा, पद्म, त्रि‍शूल, खड्.ग व धनुषबाण। आठवाँ हाथ ऊँ से अंकि‍त खाली व आशीर्वाद का प्रतीक है। आशीर्वाद भी स्वयं एक महाशक्ति है, जो प्रेरि‍का व नि‍र्माण करने वाली है। योग दर्शन में आठ प्रकार की सि‍द्धि‍याँ, शक्तियाँ मानी गईं हैं- अणि‍मा, गरि‍मा, लघि‍मा, महि‍मा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशि‍त्व, एवं वशि‍त्व। ये सब अनादि‍,अनंत व अखण्ड स्वरूपा, आदि‍ति‍नमि‍का माता दुर्गा के ही प्रति‍रूप हैं।
इस शक्ति‍‍ स्वरूपा माता की हुंकार को वैदि‍क ऋचाओं में भी सुना जा सकता है। ‘वागाम्भृतणी सूक्तं (ऋग्वेद) के आठ मंत्र दुर्गा माँ के नि‍खि‍ल स्वरूप व समस्त शक्तियों के प्रति‍नि‍धि‍ रूप है। ब्रह्मा,वि‍ष्णु व महेश, जो जगत् के क्रमश: नि‍र्माता, पालयि‍ता व संहर्ता के रूप में जाने जाते हैं- इन सब देवताओं की शक्ति को माता दुर्गा ने अपने हाथों में समेट रखा है। ब्रह्मा के चारों अस्त्र-शस्त्र, शंख-चक्र, गदा-पद्म, दुर्गा के नि‍यंत्रण में हैं।
शंख- शंख प्रतीक है स्फूर्ति‍ एवं चेतना का। शंखनाद युवाओं में प्राण फूँक देता है। कुरुक्षेत्र के समरांगण में भी सभी ने अपने शंखों को फूँका था। ‘शंख दध्मौ प्रतापवान्।‘ (गीता) श्रीकृष्‍ण का पांचजन्य‍ समाज के (पाँचों जनों)(पाँच पाण्डखवों) को जागरूक करता था।
चक्र- चक्र काल व गति‍ का प्रतीक है। केन्द्र बि‍न्दु व केन्द्र के चारों ओर की परि‍धि‍ के माध्यम से सम्पूर्ण जगत् व ब्रह्माण्ड का प्रति‍नि‍धि‍ रूप है चक्र। अखण्ड कराल ‘काल’ जो सबको पीछे छोड़ जाता है, महाशक्तिज का रूप है।
गदा- गदा को त्रोटक, प्रस्फोटक, भंजक व वि‍ध्वं‍सकारी माना गया है, अत: यह शक्ति भी महामाया में ही नि‍हि‍त है।
त्रि‍शूल व धुनष- त्रि‍शूल व धनुष, पि‍नाकपाणि‍, त्रि‍शूलधारी शि‍व के अस्त्र हैं। त्रि‍नेत्र भगवान् शि‍व को त्रि‍शूल त्रि‍लोक के तीनों दु:खों का संहारक है। रुद्र शि‍व के लि‍ए, दुर्गा धनुष की डोर खींच लेती हैं- ‘अहं रुद्राय धनुरातनोमि‍’ (ऋग्वेद) के इस मंत्र की छाया में दुर्गा के स्वरूप को देखा जा सकता है, जि‍सके बि‍ना शि‍व शव के रूप में परि‍णत है। यजुर्वेद का रुद्राध्यामय भी रुद्र की महि‍मा का द्योतक है।
पद्म- पद्म यानि‍ कमल खि‍लता हुआ सौंदर्य है। वि‍ध्वंस के पश्चात् सुंदरतम नि‍र्माण का यह प्रतीक है। यह शक्ति‍माँ दुर्गा में ही नि‍हि‍त है।
खड्.ग- यानि‍ तलवार भी तुरंत वार का प्रतीक है। राक्षसों के झुंडों के मुंडों का कर्तक होने के कारण यह दुर्गा माता के हाथ की शोभा व शृंगार है। अष्टभुजाधारि‍णी, राक्षसमर्दि‍नी, आशीर्वाददात्री, माता दुर्गा सिंहासना है, यानि‍ सिंह पर आसीन है। सिंह पशुराज है। मानवेतर प्राणि‍यों की भी वे कर्त्री-धर्त्री हैं। इस तथ्य को इससे दर्शाया गया है- समग्रत: वि‍वि‍ध अस्त्र-शस्त्रों के माध्यम से दुर्गा माता का जो शक्ति ‍स्वरूप उभारा गया है, वह अप्रति‍म व अनुपम है।
नवरात्र में दुर्गा पूजा के माध्य‍म से वस्तुत: शक्ति‍ का ध्यान कि‍या जाता है, क्योंकि‍ ‘शक्तिर्यस्त्र वि‍राजते से बलवान् स्थू‍लेषू क: प्रत्यय:’ अर्थात् जो व्यक्‍ति‍‍ शक्तित‍मान् है, वही बलवान् व वि‍जयवान् है।
(नवरात्र उपासना, फ्रेण्‍ड्स हेल्‍पलाइन, कोटा के प्रकाशन से साभार)

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

धड़कते समाचार

हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य सम्‍मेलन प्रयाग के नाथद्वारा अधि‍वेशन से लौट कर हि‍न्‍दी दि‍वस पर कुछ लि‍खने वाला था पर,धड़कते दि‍ल से सवेरे का अखबार पढ़ा और हि‍न्‍दी की हि‍न्‍दी हो गयी। पेट्रोल की कीमत फि‍र बढ़ गयीं। हाल ही में मई में ही तो बढ़ाये थे दाम। राजस्‍थान में यह लगभग रु0 70-92 प्रति‍ लीटर के आसपास बि‍केगा। पि‍छले 14 माह में 10वीं बार बढ़े हैं ये दाम। बड़े लोगों की तो नींद भी नहीं टूटेगी,पर मध्‍यम वर्ग की नींद हवा हो जायेगी। भले ही कर्मचारि‍यों का महँगाई भत्‍ता 7फीसदी बढ़ा दि‍या गया है,पर आगे त्‍योहार आ रहे हैं,अब त्‍योहारों तक तो बस एक ही आस है बोनस की। अब गैस पर भी राजनीति‍ चल रही है। उधर सभी तरह के लोन महँगे हो रहे हैं। महँगाई बढ़ रही है,पर मंत्रि‍यों की सम्‍पत्‍ति‍याँ कैसे बढ़ रही हैं!!!! 2009 में शहरी वि‍कास मंत्रालय के कमलनाथ की सम्‍पत्‍ति‍ 14 करोड़ से आज 41 करोड़ तक जा पहुँची है,भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्‍ल पटेल की सम्‍पत्‍ति‍ लगभग 80 करोड़ से आज 122करोड़ तक पहुँच गई है और सबसे जयादा आश्‍चर्य कि‍ डीएमके के एस जगतरक्षकण की लगभग 6 करोड़ से 80 करोड़ तक पहुँच गयी। कैसे कमा लेते हैं ये लोग,नेतागि‍री में क्‍या वास्‍तव में ऐसा सम्‍भव है!!!!क्‍या इनके पास कोई अलादीन का चि‍राग़ है!!!!भरतपुर के गोपाल गढ़ में वक्‍फ़ भूमि‍ वि‍वाद में,कोटा जि‍ले के मोड़क कस्‍बे में देव वि‍मान पर हमला, साम्‍प्रदायि‍क सद्भाव को फि‍र चोट पहुँची। लूट अपहरण हत्‍याओं की घटना बदस्‍तूर जारी हैं। अन्‍ना के आन्‍दोलन का प्रभाव दि‍खाई नहीं दे रहा। इन धड़कते समाचारों से आपको नहीं लगता कि‍ दि‍ल के मरीज़ों की संख्‍या में इजाफ़ा होने के आसार सौ फीसदी हैं !!!!चलि‍ए कुछ खेल की बातें करें। टीम इंडि‍या अपना सा मुँह ले कर खाली हाथ लौटने वाली है, अभी भी उसे एक जीत की आशा है--- पर नहीं लगता--- कुछ चोटि‍ल खि‍लाड़ी मुँह छि‍पा कर भारत लौट ही आये हैं, ओर सचि‍न शतकों के शतक से चूक गये---मैं समझता हूँ---,नहीं उनके प्रशंसकों में भी सुगबुगाहट है कि‍ अब सचि‍न को संन्‍यास ले लेना चाहि‍ए, यही सही समय है---मि‍0 रि‍लायबल ने सही नि‍र्णय लि‍या है, इस टीम इंडि‍या के दौरे से हॉकी इंडि‍या को जरूर थोड़ी राहत मि‍ली होगी--उनके साथ अवश्‍य ही सौतेला व्‍यवहार हो रहा है। चलि‍ए अब हिन्‍दी की थोड़ी बात कर लें। पि‍छले दि‍नों एक इमेज डाउनलोड की तो सि‍र फि‍र गया। आप भी देखें। कैसे होगा हि‍न्‍दी का सम्‍मान। हि‍न्‍दी भी सही नहीं लि‍ख सकते और पूरे वि‍श्‍व में इसका प्रचार प्रसार हो रहा है और वह भी भारत के मानचि‍त्र पर!!!! क्‍या संदेश जायेगा वि‍श्‍व में इस चि‍त्र से !!!!!! पि‍छले दि‍नों एक शीर्षस्‍थ अखबार दैनि‍क भास्‍कर ने हि‍न्‍दी दि‍वस पर एक वि‍शि‍ष्‍ट परि‍शि‍ष्‍ट नि‍काला और उसकी कीमत रख दी पाँच रुपये और उस पर तुर्रा कि‍ उसकी प्रति‍ बुक करवायें!!! ये है उनका हि‍न्‍दी प्रेम यानि‍ हि‍न्‍दी पर भी व्‍यापार। 60प्रति‍शत से अधि‍क बड़े बड़े वि‍ज्ञापनों को झेलते हैं पाठक इस अखबार में और शेष में लूट,हत्‍या,बलात्‍कार,दुर्घटनाओं और नेताओं की नोक-झोंक व छींटाकशी से अटे पड़े रहते हैं,साहि‍त्‍य तो सि‍र्फ ढूँढ़ने से ही मि‍लता है और वह भी डायबि‍टीज़ के बीमार की मीठे की चाहत की कशि‍श सा। इस अखबार के सप्‍ताह में कई संस्‍करण नि‍कलते हैं वो भी मुफ़्त,तो क्‍या हिंदी दि‍वस पर यह वि‍शेष अंक मुफ्त घर-घर नहीं पहुँच सकता था?हि‍न्‍दी की इतनी भी सेवा वह नहीं कर सकता था!!! सबसे बड़ा अखबार कहने का दम्‍भ भरता है वह,हिंदी दि‍वस पर वह यदि‍ इसे अपने सभी हिंदी-अहि‍न्‍दी क्षेत्रों के समाचार पत्रों के साथ मुफ़्त बाँटता तो एक दि‍न के लि‍ए वह कह सकता था कि‍ दुनि‍या में सबसे ज्‍यादा हिंदी पढ़ने वाला अखबार बना भास्‍कर।चलि‍ए आज के लि‍ए इतना ही सही,फि‍र कुछ धड़कते समाचार लि‍खेंगे और आप पढ़ेंगे।

सोमवार, 12 सितंबर 2011

DHARMMARG: वर्ष भर की एकादशियां, Ekdashi Fasts And Ekadashi D...

DHARMMARG: वर्ष भर की एकादशियां, Ekdashi Fasts And Ekadashi D...: BHAGWAN VISHNU (VISHVARUP) हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास य...

DIL ka RAJ: Hindi positions and plight

DIL ka RAJ: Hindi positions and plight

सान्निध्य: गत एक वर्ष में राष्ट्रूभाषा हिंदी ने क्या खोया क्य...

सान्निध्य: गत एक वर्ष में राष्ट्रूभाषा हिंदी ने क्या खोया क्य...: 14 सि‍तम्‍बर हि‍न्‍दी दि‍वस है। आइये उस दि‍न को कुछ खास अंदाज़ में मनायें। संकल्‍प लें। हि‍न्‍दी की एक कवि‍ता लि‍खें, एक वाक्‍य लि‍खें, बच्...

रविवार, 11 सितंबर 2011

वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर दर्दनाक हादसे को दस वर्ष पूरे हुए

महाशक्‍ति‍ अमेरि‍का पर तीन बड़े हमलों ने आतंकि‍यों के हौसले बुलंद कर दि‍ये और पूरा वि‍श्‍व आज आतंकवाद की चपेट में है। जनहानि‍ से देश की व्‍यवस्‍थाओं को धक्‍का पहुँचता है। सारी योजनायें धरी की धरी रह जाती हैं। दस वर्ष बीत गये पर उसके ज़ख्‍़म अभी भी हरे हैं। 2982 मौत हुईं इस हादसे में जि‍समें 3051 बच्‍चों ने अपने माता-पि‍ता खोये हैं। आज वि‍श्‍व में सबसे जयादा ध्‍यान सुरक्षा पर दि‍या जा रहा है। हमारा इति‍हास बर्बर घटनाओं का साक्षी रहा है। चाहे वह सोमनाथ को लूटने की बार बार कोशि‍श हो अथवा वर्तमान में अक्षरधाम पर हमला हो, संसद पर हमला हो या अफ़गानि‍स्‍तान पर सैन्‍य कार्यवाही, ओसामा का अंत हो या पाकि‍स्‍तान को आतंकवादि‍यों की पनाहगाह कहें, पर हमला तो देशों की संस्‍कृति‍ पर है, जि‍न्‍हें सहेज कर रखा जाना एक चुनौती बन गया है। वर्ल्‍ड ट्रेड सेन्‍टर जो आज ग्राउण्‍ड ज़ीरो है, जि‍स पर दफन हुए एक इति‍हास को नई 104 मंजि‍ला इमारत बन कर अमेरि‍का क्‍या संदेश देना चाहता है ? यह अमेरि‍का की सबसे बड़ी इमारत होगी। क्‍यों कि‍या अमेरि‍का ने ? क्‍या आवश्‍यकता थी इस इमारत की ? 11 अरब डॉलर की इस परि‍योजना के स्‍थान पर इस राशि‍ से सोमालि‍या को हरा भरा और खुशहाल कि‍या जा सकता है!!! एक नया देश बनाया जा सकता है!!! हरि‍त क्रांति‍ लायी जा सकती है!!! पर्यावरण पर काम कि‍या जा सकता है!!! आतंकवाद को खत्‍म करने के लि‍ए संयुक्‍त राष्‍ट्र स्‍तर पर एक नयी सर्वाधुनि‍क खुफि‍या एजेंसी स्‍थापि‍त की जा सकती है, जि‍सकी शाखायें वि‍श्‍व के सभी संवेदनशील देशों में हों, पर इस इमारत को बना कर अमेरि‍का क्‍या दर्शाना चाहता है, और वह भी तब जब वह स्‍वयं आर्थिक मंदी के दौर से ग़ुज़र रहा है।
ख़ैर, आइये शहीद हुए उन लोगों को स्‍मरण करें जि‍न्‍होंने वि‍श्‍व को फि‍र इक दि‍शा दी है, जीने की, कुछ कर गुज़रने की, पि‍छला भूल जाने की, जागरूक बनने की, बच्‍चों को भवि‍ष्‍य के लि‍ए एक सबक़ देने की, दादी नानी को किंवदंती बनी इन घटनाओं की कहानी अपने पोते पोति‍यों से कहने के लि‍ए। अपने हृदय पर हाथ रख कर एक संकल्‍प लेने की कि‍ हम कि‍तने जागरूक हैं ऐसी कि‍सी भी घटना के लि‍ए या हम प्रशासनि‍क व्‍यवस्‍था पर ही नि‍र्भर रहेंगे !!!‍

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

अब राष्ट्रपति‍ भवन बचा है!!!!!! गृह मंत्री को इस्ती‍फ़ा दे देना चाहि‍ए!!!!!!

मुंबई ब्लास्ट----- ताजमहल होटल आतंकी नि‍शाने पर----------जयपुर ब्लास्ट--------अक्षरधाम---------संसद पर हमला----------अब हाइकोर्ट भी खून से सना-------सुप्रीमकोर्ट पर हमले की धमकी---------तो बचा क्या -----------राष्ट्रपति‍ भवन!!!!!!
क्यों नहीं लगा सकते यहाँ आतंकी सैंध-------- जान की क्षति‍ न हो पर इस ऐति‍हासि‍ इमारत को तो खंडहर में बदला जा सकता है? जब आतंकि‍यों का हौसला इतना था कि‍ वे पेंटागन पर कर आक्रमण कर सकते हैं और वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर पर सफलता से तो पूरा वि‍श्‍व किंकर्तव्‍यविमूढ़ रह गया था, तो उनके ज़ज्‍़बे के लि‍ए फि‍र कुछ भी कर गुज़रना संभव है। चोर-चोर मौसेरे भाई। आतंकी कि‍सी भी आतंकी गुट से मदद ले कर एक ऐति‍हसि‍क दुर्घटना को कभी भी अंजाम दे सकते हैं।
आज प्रधान मंत्री क्यों मानते हैं कि‍ हमारी सुरक्षा व्यवस्था में खामी है---- सुरक्षा व्यवस्था में आज से नहीं लंबे समय से खामि‍याँ बदस्तूर जारी हैं----- तो फि‍र क्या शेष रह गया?
डाक्टर अस्पतालों में मरीजों का इलाज नहीं करते, बल्कि परीक्षण पर परीक्षण करते हैं, क्योंकि‍ आज एक आम बात हो गयी हैं, यदि‍ बीमारी समझ में नहीं आई, तो मरीज से टेस्ट पर टेस्ट करवाना उनका एक उसूल बन गया है। जाँच करना हो तो समि‍ति‍ पर समि‍ति‍याँ बन जाती हैं सरकारी महकमों में----गवाह तोड़े मरोड़े जाते हैं---साक्ष्य मि‍टाये जाते हैं----बयान बदले जाते हैं—अदालतों में तारीख पर तारीख बदलती जाती हैं--------और पुलि‍स महकमे में छोटा मोटा आतंकी पकड़ लि‍या, तो उसके लिंक के लि‍ए पहले रि‍माण्ड, फि‍र दूर दूर तक ख़ोज, जैसे कि‍ वि‍श्व का पूरा आतंकवाद एक दि‍न में खत्म कर देंगे----आतंकि‍यों की सुरक्षा पर सारा ध्यान केंद्रि‍त कर दि‍या जाता है, ताकि‍ लिंक के लि‍ए कि‍ये गये प्रयास बीच में खत्म न हो जायें। यहीं कारण है की स्व0 राजीवगाँधी के हत्यारों को अभी तक फाँसी नहीं दी जा सकी है-----अफ़जल का यह कहना की वह माफ़ी नहीं चाहता----तो उसके जवाब में यह क़हर क्यों -------क्या आतंकि‍यों के लि‍ए अफ़जल की कोई अहमि‍यत है, जो यह अंज़ाम--?
हमारे देश के नागरि‍कों को एक स्वर में इसका वि‍रोध करना चाहि‍ए कि‍ न तो कोई सरकारी वकील और न ही कोई नि‍जी वकील ऐसे आतंकि‍यों की पैरवी करे जो देश के लि‍ए ख़तरा बना हो------कानून को भी ऐसे आतंकि‍यों के लि‍ए लोक दालत जैसी प्रक्रि‍या अपनाने सम्बंधी व्यवस्थायें बनानी चाहि‍ए ताकि‍ बुद्धि‍जीवी वकीलों को अपनी कानूनी बुद्धि‍मानी जैसी वकालत झाड़ने का मौका न मि‍ल सके और आतंकि‍यों और संगीन अपराधि‍यों को जल्दी से जल्दी सज़ा मि‍ले ताकि‍ दूसरे अपराधि‍यों को एक नसीहत मि‍ल सके। इतना मौका मि‍लने से ही आतंकि‍यों का सुप्रीम कोर्ट को धमकी देने का हि‍म्मात और हौसला बढ़ता है।
हमें अपनी सड़ी गली कानूनी व्यवस्थायें बदलनी होंगी।
इस घटना से पूरा देश फि‍र एक आशंका से दो चार हो रहा है। सामने दशहरा दीपावली जैसे त्योहार आ रहे हैं जहाँ गली-गली चौराहे-चौराहे पर भीड़भाड़ का माहौल रहेगा-----ऐसे में हमारी व्यवस्था क्या होगी यह अहम सवाल देश के कर्णधारों को देखना है सोचना है। पुलि‍स वालों को चाहि‍ए कि‍ वे देश के हालात को गंभीरता से लें। सरकार को चाहि‍ए कि‍ सेना की एक विंग, बटालि‍यन, टुकड़ी सि‍वि‍ल सेवा के लि‍ए भी तय कर तत्का‍ल देश की सुरक्षा के लि‍ए संवेदनशील स्थानों पर तैनात करे। आज बोर्डर्स से ज्यादा अंदर के हालात नाज़ुक हैं---उन्हें कठोर नि‍र्णय लेने होंगे।
अब और कई क्षति‍ नहीं------अब कोई और हताहत नहीं--------अब और ज्यादा बर्दाश्त नहीं--------- करारा जवाब देना होगा इस वहशि‍यत का----------हमारे कानूनदाँओं को--------- हम फि‍र भी यह तो सहन कर लेंगे---------लेकि‍न कि‍तने इस ज़ख्म को नासूर की तरह झेलेंगे---और कि‍तने युवा इससे क्या सीख लेंगे------या तो ईश्वर जाने या भवि‍ष्य-------------कोई आम आदमी हाथों में बारूद न उठा ले---------घर में ही आतंकी न पनपने लग जायें---------------हमें धैर्य रखना होगा-------हमें अपनी संस्कृति‍ को बचाना होगा-----------हमें सत्यमेव जयते के लि‍ए फि‍र संघर्ष करना होगा----------------आइये हताहतों के लि‍ए ईश्वर से प्रार्थना करें--------उन्हें शांति‍ दे--------------किमधि‍कम्--------------- अब क़लम नहीं चल पायेगी----------!!!!!!!

बुधवार, 7 सितंबर 2011

उड़ीसा अब ओडि‍शा होगा और उड़ि‍या भाषा अब ओडि‍या होगी

संसद के दोनों सदनों ने उड़ीसा राज्य का नाम ओडि‍शा रखने पर मोहर लगा दी। अब केवल राष्ट्रपति‍ के हस्ताक्षर की देर है। मंगलवार 6 सि‍तम्‍बर को संसद में उड़ीसा बि‍ल लोकसभा में पारि‍त हो गया।
प्राचीनकाल में उत्कल,दक्षि‍ण कौशल आदि‍ के नाम से भी प्रख्यात था। महाभारत काल में यह चेदि‍ और मत्स्‍य नाम से भी पहचाना जाता था। दशरथ पत्नी कौशल्या यहॉं की ही पुत्री थी, राजा वि‍राट् मत्स्‍य देश के राजा थे जि‍नके यहाँ पाण्डवों ने अज्ञातवास काटा था। इसका सबसे चर्चि‍त और लंबे समय तक चला नाम नाम कलिंग था। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में (ई0पू0 268) मौर्य सम्राट् अशोक ने कलिंग को जीतने के लि‍ए सशक्त सेना भेजी। कलिंग पराभूत हो गया किंतु वहाँ के जनसंहार ने अशोक को बदल दि‍या, उसने बौद्घ धर्म अपना लि‍या। अशोक की मृत्यु के बाद कलिंग फि‍र स्‍वाधीन हो गया। भारत के पूर्वी तट पर झारखण्ड, बि‍हार, आंध्रप्रदेश, मध्य‍प्रदेश और बंगाल की खाड़ी से घि‍रा यह राज्य वि‍ख्यात चि‍लका झील के लि‍ए प्रसि‍द्ध है। अशोक के बाद खारवेल के शासन तक यह राज्य शक्ति‍शाली रहा। बाद में सभी राजाओं ने इसे लूटा,यहाँ तक कि‍ समुद्रगुप्त ने भी इसे तहस-नहस कि‍या। अंत में हर्ष ने से अपने अधीन कर लि‍या। 795 ई0 में महाशि‍वगुप्त ययाति‍ द्वि‍तीय के शासन काल इसका स्वंर्णकाल कहलाया। कहते हैं इसी ने पुरी का वि‍ख्यात जगन्नाथ मंदि‍र बनवाया। नरसिंह देव ने कोणार्क मंदि‍र बनवाया। 1592 ई0 में अकबर ने इसे मुग़ल साम्राज्य में वि‍लय कर लि‍या। मुग़लों के पतन के बाद 1803 तक यह मराठों के कब्ज़े में रहा। उसके बाद यह अंग्रेजों के शासन में आ गया। 1949 में यह एक स्वतंत्र राज्य बना। मंदि‍रों का शहर भुबनेश्वर इस राज्य की राजधानी है। इससे पहले इसकी राजधानी कटक थी। पुरी (जगन्नाथ पुरी) समुद्रतटीय शहर है। कटक का बाराबती कि‍ला ऐति‍हासक स्थवल है। संबलपुर के पास हीराकुण्ड बाँध वि‍श्व का चौथा सबसे बड़ा बाँध है। ओडि‍शा में चक्रवात आते रहते हैं, सबसे तीव्र चक्रवात 1999 में आया था। यह सम्पूर्ण चावल उत्पादक राज्य है।

शनिवार, 3 सितंबर 2011

आकुल को 'साहि‍त्‍य श्री' सम्‍मानोपाधि‍

कोटा के जनवादी कवि‍, संगीतकार, साहि‍त्‍यकार, लेखक, सम्‍पादक क्रॉसवर्ड वि‍जर्ड गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल' को राष्‍ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव ट्रस्‍ट, सि‍होरा, जबलपुर म0प्र0 द्वारा उनकी हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य सेवा व सम्‍पादन कार्य के लि‍ए 2011 की 'साहि‍त्‍य श्री' सम्‍मानोपाधि‍ प्रदान की है। श्री 'आकुल' के साथ कोटा के ही वरि‍ष्‍ठ साहि‍त्‍यकार श्री रघुनाथ मि‍श्र को साहि‍त्‍यि‍क, सांस्‍कृति‍क कला संगम अकादमी परि‍यावाँ, प्रतापगढ़ उ0प्र0 द्वारा वर्ष 2011 के लि‍ए सम्‍मान के लि‍ए भी चयन कि‍या गया है। 30 अक्‍टूबर 2011 को आयोजि‍त होने जा रहे इस भव्‍य समारोह में श्री 'आकुल' को 'वि‍वेकानन्‍द सम्‍मान' से वि‍भूषि‍त कि‍या जायेगा और श्री मि‍श्रा को 'वि‍द्या वाचस्‍पि‍त (मानद)' से सम्मानि‍त कि‍या जायेगा। अकादमी के सचि‍व श्री वृन्‍दावन त्रि‍पाठी रत्‍नेश ने पत्र एवं दूरभाष से सम्‍पर्क कर दोनों को चयन की सूचना दी और बधाई दी। उन्‍होंने बताया कि‍ इस भव्‍य समारोह अखि‍ल भारतीय स्‍तर के लगभग 40 से 50 साहि‍त्‍यकारों को प्रति‍वर्ष सम्‍मानि‍त कि‍या जाता है। इस वर्ष भी 100 से अधि‍क साहि‍त्‍यकारों को सम्‍मानि‍त कि‍या जायेगा। सभी जगह आमंत्रण पत्र भि‍जवा दि‍ये गये हैं ओर स्‍वीकृति‍याँ आने लग गयी हैं। समारोह में हि‍न्‍दी गरि‍मा सम्‍मान, कला मार्तण्‍ड, हि‍न्‍दी सेवी सम्‍मान, साहि‍त्‍य मार्तण्‍ड, पत्रकार मार्तण्‍ड, वि‍द्या वाचस्‍पति‍, वि‍द्या वारि‍धि‍, साहि‍त्‍य महामहापाध्‍याय, रोहि‍त कुमार माथुर स्‍मृति‍ सम्‍मान, पं0 जगदीश नारायण त्रि‍पाठी स्‍मृति‍ सम्‍मान, पं0 जगदीश नारायण त्रि‍पाठी स्‍मृति‍ सम्‍मान, प0 दुर्गाप्रसाद शुक्‍ल स्‍मृति‍ सम्‍मान, सुश्री सरस्‍वती सिंह सुमन स्‍मृति‍ सम्‍मान और कबीर सम्‍मान भी दि‍ये जायेंगे। श्री भट्ट और श्री मि‍श्रा 29 अक्‍टूबर को कोटा से परि‍यावाँ के लि‍ए रवाना होंगे। श्री त्रि‍पाठी ने बताया कि‍ सम्‍मान समारोह की भागीदारी सहयोगी संस्‍था तारि‍का वि‍चार मंच करछना इलाहाबाद और विंध्‍यवासि‍नी हि‍न्‍दी वि‍कास संस्‍थान नई दि‍ल्‍ली भी साहि‍त्‍यकारों का सारस्‍वत सम्‍मान करेंगी।
श्री भट्ट और मि‍श्रा को इस सम्‍मान के लि‍ए बधाइयों का ताँता लगा हुआ है। भट्ट को उनकी पुस्‍तक 'जीवन की गूँज' और श्री मि‍श्रा को उनकी पुस्‍तक 'सोच ले तू कि‍धर जा रहा है' के लि‍ए उनकी साहि‍त्‍य सेवा के लि‍ए सम्‍मानि‍त कि‍या जा रहा है।

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

यह कोई नई चाल तो नहीं !!!!!

भ्रष्‍ट लोग अपने बचाव के लि‍ए कि‍सी भी हद तक गुज़र सकते हैं। अन्‍ना ने अनशन तोड़ दि‍या, ठीक है, अग्‍नि‍वेश की असलि‍यत सामने आई, चलो यह भी ठीक है, शांति‍पूर्ण आंदोलन खत्‍म हुआ, अन्‍ना खेमा भी कमजोर पड़ने लगा था इसलि‍ए जो हुआ ठीक ही हुआ, अन्‍ना दृढ़ हैं, पर नकी टीम !!!!! तूफ़ान के बाद की शांति‍ से लगता है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, माना सरकार के पास मानने के सि‍वा कोई चारा ही नहीं था,भावी नेता की छवि‍ में राहुल गाँधी के वक्‍तव्‍य ने जनता को फि‍र सोचने को मज़बूर कर दि‍या है, कांग्रेस के पास भावी प्रधानमंत्री की छवि‍ धूमि‍ल है,पि‍छले दि‍नों एक आई ए एस ने अपनी पत्‍नी को डंडे से पीट कर मार डाला और अदालत जा पहुँचा,कामकाज कि‍या, परि‍वादों में तारीखें दीं,पि‍छले दि‍नों राजस्‍थान वि‍धान सभा में भ्रष्‍टाचार पर बहस ही नहीं हो सकी और चप्‍पल कांड और महि‍ला वि‍धायक से अभद्रता और अपशब्‍द जैसी घटना हो गयी,क्‍या बौखला गये हैं नेता? या इस आंदोलन से उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा, देश के हालात जस के तस हैं, काम काज जस का तस चल रहा है,रैगिंग पर भले ही सुप्रीप कोर्ट ने रोक लगा दी हो लेकि‍न धड़ल्‍ले से रैगिंग हो रही है, सीनि‍यर रेजि‍डेन्‍ट डॉक्‍टर्स जूनि‍यर्स पर बॉसगि‍री थोप रहे हैं, इस बार की बरसात ने भ्रष्‍टाचार की पोल खोल दी है,मुद्रा स्‍फीति‍ का बोझ और आयरीन समुद्री तूफान ने अमेरि‍का को अंदर से बहुत कमज़ोर बना दि‍या है,भारत को इस तक का लाभ उठाना चाहि‍ए, पर ऐसा दि‍माग से नहीं नहीं करेंगे नेता,इसमें भी कोई मौक़ा ढूँढ़ेंगे, बालि‍का वधु और ससुराल सि‍मर टी0वी0 सीरि‍यल समाज को ग़लत संदेश दे रहे हैं,स्‍व0 राजीव गाँधी के हत्‍यारों को फाँसी के लि‍ए फि‍र राजनीति‍ खेली जा रही है,राजस्‍थान में आरक्षण के अदालती आदेश पर सरकारें नि‍र्णयों की पालना करने को गंभीरता से नहीं ले रही है, सूचना का अधि‍कार को लागू कर सरकार ने जो सि‍रदर्द मोल ले लि‍या है,कहीं ऐसा तो नहीं शांति‍पूर्ण ढंग से जनता के आक्रोश को देख कर सरकार ने आनन फानन में स्‍वीकार तो कर लि‍या, यह सोच कर कि‍ दो दि‍न में तो जन लोक पाल बि‍ल बनना नहीं है,कोई नया लोकुना मि‍ल जायेगा, तो उसे खि‍सकाया जा सकता है, जन सैलाब के परि‍णाम कुछ भी हो सकते थे,क्‍योकि‍ सरकारी कामों को खि‍सकाना हो तो अनेकों कार्यालयों में काम का बोझ सरकार पर डालने की परम्‍परा 'सरकार से पूछा जाये,स्‍वीकृति‍ लें,उच्‍च स्‍तर पर नि‍र्णय के लि‍ए अग्रेषि‍त करें,जैसे जुमले आए दि‍नों सुनने देखने को मि‍लते हैं।ठीक है, देखते हैं ऊँट कि‍स करवट बैठता है,पर अन्‍नाजी,एक गाँधी गि‍री से पाकि‍स्‍तान बन गया, दूसरी कूटनीति‍ से बांग्‍लादेश बन गया किंतु इससे हमने बहुत कुछ खोया है जि‍सका वि‍क्‍ल्‍प आज तक नहीं मि‍ल रहा है,हमने वल्‍ल्‍भ भाई पटेल की बात नहीं मानी,परि‍णाम सामने है,काश्‍मीर मुद्दा नासूर बन रहा है,लाल बहादुर शास्‍त्री जैसा कद्दावर नेता खोया है हमने,आज कि‍सी भी पार्टी के पास वि‍श्‍वसनीय भावी अगुआ नहीं है,अपने देश में पग-पग पर भ्रष्‍टाचार को गाँधीगि‍री से नहीं खत्‍म कि‍या जा सकता,इस पर कुछ नया सोचना होगा,आप सोचि‍ए आपके पास रक्षक,अंगरक्षक और संरक्षक सब हैं,आम जनता को तो पहले पेट पालना है,इन मुद्दों पर लंबी लड़ाई लड़ने की ताक़त कहाँ से लायेगी जब जन संगठन कि‍सी न कि‍सी रूप में बि‍ना कठोर नि‍यंत्रण के चल रह हैं औश्र मजदूर संगठन अब लगभग रहे ही नहीं जो एक आवाज़ पर खड़े हो जाया करते थे, आधुनि‍क तकनीक ने यह नुकसान तो कि‍या है,खैर सौ बातो की एक बात,दि‍ल्‍ली अब सौ साल की हो गयी है,हर मुद्दे पर वह अपना नि‍यंत्रण खोती जा रही है,क्‍या अब दूसरी राजधानी नहीं बनायी जानी चाहि‍ए!!!!, मुंबई नहीं बन सकती !!!!! अभेद्य दुर्ग, फि‍र आतंकवाद का हल स्‍वत: मि‍ल जायेगा, हि‍न्‍दी भाषा को एक नया आयाम मि‍लेगा, पर अन्‍ना यह तो बतायें, अभी तक जो भी हुआ, क्‍या सरकार की यह कोई नई चाल तो नहीं !!!!! आज गणेश चतुर्थी है, अन्‍ना बधाई हो, श्रीगणेश तो हुआ, आज के पर्व की बहुत बहुत बधाई हो, अन्‍ना गणपति‍ बप्‍पा मोरि‍या।

सोमवार, 29 अगस्त 2011

पूर्वाभास: धर्मेन्द्र कुमार सिंह, अनिल जनविजय और कुमार मुकुल...

पूर्वाभास: धर्मेन्द्र कुमार सिंह, अनिल जनविजय और कुमार मुकुल...: धर्मेन्द्र कुमार सिंह


अनिल जनविजय


कुमार मुकुल

आदरणीय अनिल जी, ल...

काव्य का संसार: इस ब्लॉग का शुभारंभ 1 सितम्बर से किया जायेगा | सदस...

काव्य का संसार: इस ब्लॉग का शुभारंभ 1 सितम्बर से किया जायेगा | सदस...: इस ब्लॉग का शुभारंभ 1 सितम्बर से किया जायेगा | सदस्यता को इच्छुक मित्र / बंधु यहाँ अपना ईमेल पता कमेंट करें | ब्लॉग शुरू होते ही सदस्यता हेत...

रविवार, 28 अगस्त 2011

कौन बनेगा करोड़पति‍ कार्यक्रम में 'बि‍ग बी' ने सुनाई शरद तैलंग की रचनायेँ

कोटा : १५ अगस्‍त से सोनी टीवी पर प्रारम्भ हुए चर्चित कार्यक्रम “कौन बनेगा करोडपति” मेँ कार्यक्रम के स्टार संचालक अमिताभ बच्चन ने कोटा के कवि एवँ संगीतकार शरद तैलंग की कुछ हास्य रचनायें, बरसाती दोहे तथा सफल शादी सुनाईँ हैँ जिस पर दर्शकोँ ने खूब ठहाके लगाये । ये रचनायेँ कार्यक्रम मेँ “चन्द केबीसी छन्द’ के नाम से सुनाई जा रहीँ है ।“ पहन हवाई चप्पलेँ जाओगे जब मित्र, बरसातोँ मेँ पीठ पर बन जायेगा चित्र”। तैलंग ने बताया कि आगे के एपीसोड मेँ भी उनकी कई हास्य व्‍यंग्‍य रचनायें शामिल की जा रहीँ हैँ । उन्होनेँ कहा कि सदी के महानायक के मुख से अपनी कवितायेँ सुनना उन्हेँ बहुत रोमांचकारी लग रहा है । अमिताभ बच्चन की आवाज़ मेँ शरद के बरसाती दोहे यू ट्यूब पर Amitabh Bachchan's funny poetic lines on Rain - Episode 2 - KBC 2011 - 16th August 2011 सर्च करके भी सुने का सकते हैँ ।

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'दृष्टि‍कोण' ने दूसरे वर्ष में प्रवेश कि‍या। पाँचवाँ अंक 'ग़ज़ल परि‍शि‍ष्‍ट' के रूप में प्रकाशि‍त

कहानी दर्द की मैं ज़ि‍न्दगी से क्या कहता।
यह दर्द उसने दि‍या है उसी से क्या कहता।

तमाम शहर में झूठों का राज़ था ‘अख्तर’,
मैं अपने ग़म की हक़ीक़त कि‍सी से क्या कहता।।

-एहतेशाम ‘अख्तर’ पाशा
कोटा। 60 पृष्ठीय रंगीन कलेवर वाली, ज्‍यादा से ज्यादा साहि‍त्यकारों, वि‍शेषकर नवोदि‍त रचनाकारों को प्राथमि‍कता देने वाली, लगभग 100 रचनाकारों को बारी-बारी से प्रकाशि‍त करने वाली, पूरे देश में नवाज़ी जा रही राजस्‍थान की साहि‍त्‍यि‍क एवं सांस्‍कृति‍क राजधानी कोटा शहर से प्रकाशि‍त त्रैमासि‍क पत्रि‍का ‘दृष्टि‍कोण’ ने एक वर्ष पूरा कर लि‍या। ‘दृष्टि‍कोण’ का पाँचवाँ अंक पि‍छले दि‍नों प्रकाशि‍त हो गया। ‘ग़ज़ल परि‍शि‍ष्ट’ के रूप में यह दृष्टिकोण का संग्रहणीय अंक है।






‍मि‍त्रों के लि‍ए मि‍त्रों के सहयोग से फ्रेण्ड्स हेल्पलाइन, कोटा (राजस्थान) का यह प्रकाशन, रचनाकारों से मि‍त्रता करने के अपने अनोखे अंदाज़ के लि‍ए शीघ्र ही राष्‍ट्रीय स्तर पर अपना ख़ास स्थान बनाता जा रहा है। अहि‍न्दीभाषी क्षेत्र आंध्रप्रदेश की राजधानी हैदराबाद से प्रकाशि‍त साहि‍त्यि‍क मासि‍क और एक दशक से भी अधि‍क समय से स्थापि‍त हि‍न्दी पत्रि‍का ‘गोलकुण्डा दर्पण’ ने ‘दृष्टि‍कोण’ के पहले ही अंक से आकर्षि‍त हो कर इस पर हैदराबाद में वि‍चार गोष्ठी कर डाली थी। उसके समाचार आधे पृष्ठ पर छापे और इसके सुंदर भवि‍ष्य पर अपने क़सीदे सुनाये, पर यह भी कहा कि‍ कम से कम 1 वर्ष से पहले इस पत्रि‍का का मूल्यांकन करना जल्दबाज़ी होगी।
पाँचवे अंक ने नई ऊर्जा के साथ साहि‍त्यिक यात्रा की नई दौड़ आरंभ की है। दूसरे साल में प्रवेश करते हुए यह अंक ‘ग़ज़ल परि‍शि‍ष्ट’ के रूप में प्रस्तु्त हुआ है। अगला अंक ‘लघु कथा’ अंक होगा, उसके पश्चात् सातवाँ अंक ‘गीत’ परि‍शि‍ष्ट होगा।
अन्‍य वि‍‍धाओं के अलावा 70 हि‍न्दी’ उर्दू ग़ज़लों के इस परि‍शि‍ष्ट में देश के नामचीन शायरों का शुमार है। इस पत्रि‍का में जहाँ मशहूरोमारुफ़ आसी, हुमा, अनि‍ल अनवर, मधुर नज्मी, एहतेशाम अख्तर पाशा, असीर, शकूर अनवर, नाज़, फ़साहत अनवर, मछलीशहरी जैसे फ़नकार हैं, वहीं स्वतंत्रता दि‍वस की ऊर्जा बटोरे चंद्रभानु मि‍श्र, मो0 रफ़ीक़ ‘राही’, सुरेश शारदा, खु़र्शीद नवाब, ने भी आज़ादी का जज्बा ग़ज़ल में प्रस्तुत कि‍या है, और उसमें चार चाँद लगाये हैं राजस्थान वि‍धान सभा के सदस्य रहे, राजस्थान वि‍श्ववि‍द्यालय के सीनेटर रहे, मधुमती और चि‍दम्ब‍रा जैसी पत्रि‍काओं के सम्पादक रहे, और जि‍नके साहि‍त्य पर 3 पीएच0डी0 और 9 शोध हुए और उम्र के नौवें दशक में चल रहे हिंदी ग़ज़लों के शहंशाह वयोवृद्ध वरि‍ष्ठ साहि‍त्यकार डॉ0 दयाकृष्ण‘वि‍जय’ ने, जि‍नकी प्रकाशि‍त रचना ‘सोनाई मसि‍ से भारत का नाम लि‍खें/ मानव-ऊर्जा के वि‍राट आयाम लि‍खें। समि‍धा बन स्वातंत्र्य-समर की हवन हुए/ कुछ लि‍खने से पहले उन्हें प्रणाम लि‍खें' भी हि‍न्दी ग़ज़ल की एक अनूठी रचना है। डॉ0 वि‍जय की दूसरी देशभक्ति‍‍ रचना ‘देश का सबके हृदय में मान होना चाहि‍ए—' भी हि‍न्दी ग़ज़ल की मि‍साल है।
पत्रि‍का में नारी संवर्द्धन पर आकांक्षा यादव और कन्या भ्रूण हत्या पर कुँवर प्रेमि‍ल के लेख भी ग़ज़ल का सा असर छोड़ते हैं, दि‍ल को छू जाते हैं। ‘आपके लि‍ए’ स्तम्भ‍ में रचनाकारों ने जो भी लि‍खा है ग़ज़ल में लि‍खा है। राजस्थान साहि‍त्य अकादमी उदयपुर से जि‍नके नाम से कहानी के लि‍ए पुरस्कार घोषि‍त है,ऐसी वि‍लक्षण प्रति‍भा की धनी लेखि‍का डॉ0 सरला अग्रवाल, राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाने वाली साहि‍त्यिक पत्रि‍का ‘कर्मनि‍ष्ठा’ के सम्पादक डॉ0 मोहन ति‍वारी ‘आनंद’, 250 से अधि‍क साहि‍त्यि‍क पुरस्कारों से सम्पूर्ण देश वि‍देश में ख्याति‍ प्राप्त पेशे से आयुर्वेदि‍क चि‍कि‍त्सक डॉ0 अशोक गुलशन, शि‍क्षावि‍द् प्रोफेसर प्रेम मोहन लखोटि‍या, भी इसमें छपे हैं। कवयि‍त्रि‍यों में सरोज व्यास, शोभा कुक्कल, उमाश्री और सुषमा भण्डारी ने भी ग़ज़ल में अपनी छाप छोड़ी है। छोटी छोटी 5 लघुकथाओं ने भी ग़ज़लों के बीच आकर्षि‍त कि‍या है। समीक्षार्थ प्राप्त़ काव्य/ग़ज़ल वि‍धा की 8 पुस्तकों से श्रेष्ठ एक-एक रचना को समीक्षा स्वरूप ही प्रकाशि‍त कर उसकी गरि‍मा को भी बनाये रखा है ‘दृष्टि‍कोण’ ने, ताकि‍ शेष रचनाकार अपने अपने ढंग से पुस्तक में छि‍पी लेखक की प्रति‍भा को जान सकें और पुस्तक का स्वमूल्यांकन कर सकें।
और अंत में हर रचनाकार के दि‍ल में एक बार मि‍लने की चाहत पैदा कर देने वाले ‘आपस की बात’ में नरेंद्र चक्रवर्ती ‘मोती’ ने अपनी बात ऐसे कही है, जैसे वे आप से ही बातें कर रहे हैं, इसे पढ़े बि‍ना तो आप रह ही नहीं सकते। बहुत कम जानते होंगे कि‍ वे ‘मोती’ तख़ल्लुस लगाते हैं और रचनायें भी रचते रहते हैं, कि‍न्तु सम्मानों और छपने में कम वि‍श्वा‍स करते हैं। ‘एकला चालो’ की तर्ज पर कुछ करते रहने का जज्बा उनमें कूट-कूट कर भरा हुआ है। बहुत कम सम्पादक हैं, जो इस तरह अपनी बात कहते हैं, और यही ‘दृष्टि‍कोण’ की ख़ूबी है।
बात परि‍शि‍ष्ट की है,तो थोड़ी सी बात एक अन्य पत्रि‍का की भी। साहि‍त्यि‍क पत्रि‍का ‘शब्द प्रवाह’ के अप्रेल-जून 2011 के ‘दोहा वि‍शेषांक’ में वि‍शेष परि‍शि‍ष्ट में उज्जैन के रचनाकार श्री कैलाश सोनी ‘सार्थक’ के 16 पृष्ठ ठूँसे हुए हैं, जि‍नमें एक भी दोहा नहीं, गीत व ग़जल व कवि‍तायें ही हैं। बड़ा अटपटा लगा। एक पृष्ठ भी यदि‍ उनके दोहों का होता, तो उनके सृजन का 16 पृष्ठीय ‘वि‍शेष परि‍शि‍ष्ट’ सार्थक बन जाता। यह पत्रि‍का का व्यावसायि‍क दृष्टिकोण हो सकता है,कि‍न्तु वि‍शेषांक के साथ न्या‍य नहीं कहा जायेगा। वि‍शेषांक के साथ वि‍शेष परि‍शि‍ष्ट नहीं लगाये जाते और वो भी अन्य वि‍धा के। दोहों,छंदों के लि‍ए समर्पि‍त पत्रि‍का ‘मेकलसुता’ सम्पूर्ण इसी वि‍धा की पत्रि‍का है,तो ‘शब्द‍ प्रवाह’ को ‘वि‍शेष परि‍शि‍ष्ट’ के लि‍ए दोहों के कि‍सी नि‍ष्णात कवि‍ का सहयोग नहीं मि‍ला होगा, गले नहीं उतरता। आश्चर्य तो इस बात का है कि‍ अति‍थि‍ सम्पादक ने भी इसमें आपत्ति नहीं उठाई है। हाँ, श्री‘सार्थक’सोलह पृष्ठों को अलग कर एक रंगीन या श्वेत-श्याम ग्लोज़ी पन्ने के आवरण के साथ जोड़ कर पृथक एक पुस्ति‍का बना कर अपनी पुस्तक शृंखला को बढ़ा सकते हैं, कि‍न्तु पृष्ठ संख्या ने उनका यह ख्वाब भी उनसे छीन लि‍या है। खैर आइये, हम ‘दृष्टि‍कोण’ की ही बातें करें।
आज साहि‍त्यि‍क पत्र-पत्रि‍काओं की प्रति‍स्पर्द्धा द्रुतगति‍ से बढ़ रहे इंटरनेट पर हि‍न्दी साहि‍त्यिक ब्लॉग्स से है। नवोदि‍त साहि‍त्यकारों की जि‍जीवि‍षा को पोषि‍त करती पत्रि‍का ‘दृष्टि‍कोण’ का यह शैशव काल है, इसलि‍ए इसमें सभी रचनाकारों, साहि‍त्यकारों द्वारा उँगली पकड़कर योगदान करने का अपना दृष्टिकोण सतत बनाये रख कर अपना साहि‍त्य-मैत्री धर्म नि‍भाना होगा,चाहे वे छपें या न छपें। प्रबंध सम्पादक नरेंद्र चक्रवर्ती को अति‍उदारतावादी दृष्टिकोण में संयम बरतते हुए इसे बुरी नज़र से बचाये रखने के सभी संभव प्रयास करने होंगे, क्योंकि‍ उनका गैरव्या‍वसायि‍क दृष्टि‍कोण उन्हें सदस्यों और रचनाकारों की नि‍रन्तर ऊर्जा प्रवाह से ही सशक्त बना पायेगा। पत्रि‍का में सभी साहि‍त्य कार अपनी वि‍धा में सि‍द्धहस्त लगे, जि‍ससे यह परि‍शि‍ष्ट अवश्य सराहा जायेगा।
यह अंक 15 अगस्त को पाठकों के हाथों में होना चाहि‍ए था। कुछ वि‍लम्ब से प्रकाशि‍त हुआ है, इसलि‍ए और अधि‍क वि‍लम्ब न हो इसे शीघ्र नि‍काला गया,वरन् फि‍लर के रूप में भरे गये स्थानों पर लगभग 10रचनाकारों को और स्था‍न मि‍ल सकता था। पि‍छले चारों अंकों में शामि‍ल सम्पादकीय टीम के साहि‍त्यकार रघुनाथ मि‍श्र इस अंक में नहीं हैं। बारीक चलनी और खुर्दबीन एक तरफ़ सरका कर नुक्ताचीनी को बाला-ए-ताक़ देखें तो पत्रि‍का राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रि‍काओं की फेहरि‍स्त में अपना नाम दर्ज कराने की पूरी सलाहि‍यत रखती है।
आज जहाँ भ्रष्टाचार के खि‍लाफ़ सारा देश एकजुट है,वहाँ देश को पुन:सचेत करते हुए इस पत्रि‍का में प्रकाशि‍त एक कवि‍ की कल्पना की इन पंक्‍ति‍यों से अपने दृष्‍टि‍कोण का समापन करना चाहता हूँ-
अनुशीलन, मंथन, चिंतन कर दृढ़ संकल्पि‍त हों।
मार्ग बहुत है कंटकीर्ण ना पथ परि‍वर्ति‍त हों।
परि‍वीक्षण कर कुछ करने आगे अग्रेषि‍त हों।
नि‍:स्वार्थ दि‍लेर युवाओं का यह अन्नप्राशन पर्व।
मंगलमय हो स्वतंत्रता का स्वर्णि‍म पावन पर्व।।

शनिवार, 27 अगस्त 2011

पूर्वाभास: प्रेमचंद गांधी और योगेंद्र कृष्णा के पत्र ललित कुम...

पूर्वाभास: प्रेमचंद गांधी और योगेंद्र कृष्णा के पत्र ललित कुम...: प्रेमचंद गांधी


योगेंद्र कृष्णा


ललित कुमार प्रशासक- कविता कोश

नमस्‍कार...

काव्‍यजगत् के महासागर ब्‍लॉग कवि‍ताकोश का समाचार स्‍तब्‍ध कर देने वाला

24 अगस्त 2011 के कवि‍ताकोश समाचार व अन्‍य साहि‍त्‍यि‍क समाचारों से काव्‍यजगत् स्‍तब्‍ध है। हाल ही में कवि‍ता कोश के समाचार हूबहू प्रस्‍तुत हैं-
* श्री अनिल जनविजय का कविता कोश टीम से त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया है।
* नवनियुक्त संपादक श्री प्रेमचंद गांधी ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।
* इस समय कविता कोश संपादक का पद खाली है और संपादकीय कार्य कविता कोश टीम के अन्य सदस्य देखेंगे।
* संपादक पद के लिए उचित उम्मीदवार मिलने तक यह पद खाली रहेगा।
* नोहार, राजस्थान के रहने वाले आशीष पुरोहित को राजस्थानी विभाग में रचनाएँ जोड़ने के लिए कार्यकारिणी में शामिल किया गया है।
इस समाचार से ब्‍लॉग्‍स की दुनि‍या में एक हलचल अवश्‍य मचेगी। क्‍यों हुआ?अनि‍ल जनवि‍जय की हाल ही में कवि‍ता कोश प्रथम पुरस्‍कारों में चर्चा हुई थी। कवि‍ता कोश के वरि‍ष्‍ठ साहि‍त्‍यकार मास्‍को, रूस में कार्यरत वे पि‍छले पाँच वर्षों से इससे जुड़े थे। संभवतया पाँच वर्ष के अपने सफल कार्यकाल के पश्‍चात् कवि‍ताकोश को नये प्रतीक्षा के लि‍ए उन्‍होंने यह नि‍र्णय लि‍या हो। किंतु कवि‍ता कोश के राजस्‍थान वि‍भाग के प्रति‍नि‍धि‍ साहि‍त्‍यकार श्री प्रेमचंद गाँधी ने भी त्‍यागपत्र क्‍यों दे दि‍या? पि‍छले दि‍नों साहि‍त्‍यि‍क पत्रि‍का 'ग़ज़ल के बहाने' के बंद होने की भी खबरें सुनाई दीं। 'गोलकोण्‍डा दर्पण'के भी अंक नहीं छपने से उसका पोस्‍टल-रजि‍स्‍ट्रेशन खत्‍म होने से वह आर्थि‍क संकट से गुज़र रही है। इसके सम्‍पादक गोवि‍न्‍द अक्षय का मौन भी कष्‍टदायक है। अधि‍कतर पत्र-पत्रि‍कायें वि‍लम्‍ब से प्रकाशि‍त हो रही हैं ओर चरमराती डाक व्‍यवस्‍था से पाठकों तक देर से पहुँचने के कारण भी कम चि‍न्‍ताजनक नहीं। खैर यदि‍ सकारात्‍मक सोचें तो आगे यदि‍ कवि‍ताकोश जैसे ब्‍लॉग्‍स पर संकट और अन्‍य साहि‍त्‍यि‍क पत्र पत्रि‍काओं की दयनीय स्‍थि‍ति‍ पर साहि‍त्‍यि‍कारों की दृष्‍टि‍ पड़ेगी तो अवश्‍य एक साहि‍त्‍यि‍क सोच पैदा होगी और इसके संवर्धन परि‍वर्धन के लि‍ए सापेक्ष प्रयास होंगे। ऐसी स्‍थि‍ति‍ में आवश्‍यक है कि‍ हम इनसे संवाद कायम करें और इसके वि‍कास में योगदान दें।
वक्‍त के घावों पे वक्‍त ही मरहम लगायेगा
वक्‍त ही अपने परायों की पहचान करायेगा
वक्‍त की हर शै का चश्‍मदीद है आईना
पीछे मुड़ के देखा तो वक्त नि‍कल जायेगा।

साहि‍त्‍य और साहि‍त्‍यकारों की ख़ैर-ख़बर रखें- सम्‍पादक

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

'सान्‍नि‍ध्‍य' द्वारा ब्‍लॉग समाचारों के लि‍ए सेतु के रूप में नया ब्‍लॉग 'सान्‍नि‍ध्‍य सेतु' आज से शुभारंभ

कोटा।15 अगस्‍त 2011 से, ब्‍लॉग 'सान्‍नि‍ध्‍य' के एक सहयोगी समाचार ब्‍लॉग 'सान्‍नि‍ध्‍य सेतु' ने एक संकल्‍प के साथ अपना कार्य आज से आरंभ कर दि‍या। इसके सम्‍पादक गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल' ने बताया कि‍ 'सान्‍नि‍ध्‍य' उनका अपना साहि‍त्‍यि‍क झरोखा है और 'सान्‍नि‍ध्‍य सेतु' साहि‍त्‍यि‍क ब्‍लाग्‍स की दुनि‍या के समाचारों को यथा संभव ज्‍यादा से ज्‍यादा प्रकाशि‍त कर हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य प्रेमि‍यों, हि‍न्‍दी पाठकों और संजाल प्रेमि‍यों को जोड़ने का सेतु का कार्य करेगा। इसे शनै: शनै: सशक्‍त, उन्‍नत और आधुनि‍क बनाने का हर संभव प्रयास कि‍या जायेगा। इस ब्‍लॉग को ज्‍यादा से ज्‍यादा ब्‍लॉग्‍स से लिंक कि‍या जायेगा, ताकि‍ इसमें ताजा समाचार पाठकों को पढ़ने को मि‍लें। उन्‍होंने अपील की कि‍ ज्‍यादा से ज्‍यादा ब्‍लॉगर्स इसमें अपने लिंक भेजें ताकि‍ उन्‍हें प्रकाशि‍त कि‍या जा सके। क्रमश:......

युवा गीतकार अवनीश सिंह चौहान को मिला प्रथम कविता कोश सम्मान

वेबसाईट "कविता कोश" द्वारा युवा गीतकार अवनीश सिंह चौहान को "प्रथम कविता कोश सम्‍मान- 2011" से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें एक समारोह में 07 अगस्त 2011 में जयपुर के जवाहर कला केंद्र के कृष्णायन सभागार में प्रदान किया गया । इस आयोजन में वरिष्ठ कवि श्री विजेन्द्र, श्री ऋतुराज, श्री नंद भारद्वाज एवं वरिष्ठ आलोचक प्रो. मोहन श्रोत्रिय भी उपस्थित थे। वेबसाईट के संचालक-संपादक वरिष्ठ साहित्यकार अनिल जनविजय (मास्को, रूस में कार्यरत) ने जानकारी दी है कि "कविता कोश" के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह " प्रथम कविता कोश सम्मान-2011" आज इस भव्य समारोह में प्रदान किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि‍ सम्‍मानि‍त होने वाले श्री अवनीश सिंह चौहान हिन्दी गीत-नवगीत के सशक्त युवा कवि होने के साथ-साथ इंटरनेट पत्रिकाओं (पूर्वाभास और गीत-पहल) के सम्पादक भी हैं। श्री चौहान की गीत रचनाएँ देश-विदेश की अनेकों साहित्यिक पत्रिकाओं (ई-पत्रिकाओं सहित) में प्रकाशित हुईं हैं तथा उनका पहला गीत संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रहा है। इटावा (उ.प्र.) में जन्मे श्री चौहान को यह सम्मान मिलने पर उनके मित्रों- साहित्यकार बंधुओं ने उन्हें बधाई दी है।
समारोह में कविता कोश की तरफ से कविता कोश के संस्थापक और प्रशासक ललित कुमार, कविता कोश की प्रशासक प्रतिष्ठा शर्मा, कविता कोश के संपादक अनिल जनविजय कविता कोश की कार्यकारिणी के सदस्य प्रेमचन्द गांधी, धर्मेन्द्र कुमार सिंह, कविता कोश टीम के भूतपूर्व सदस्य कुमार मुकुल एवं कविता कोश में शामिल कवियों में से आदिल रशीद, संकल्प शर्मा, रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु', माया मृग, मीठेश निर्मोही, राघवेन्द्र, हरिराम मीणा, बनज कुमार ‘बनज’ आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि ऋतुराज, नंद भारद्वाज और मोहन श्रोत्रिय ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। और आभार अभिव्यक्ति अनिल जनविजय ने की।