गुरुवार, 17 अगस्त 2017

सान्निध्य: इक मुसकान दे आएँ


सान्निध्य: इक मुसकान दे आएँ: छंद - विधाता मापनी- 1222 1222 1222 1222 पदांत- दे आएँ समांत- आन किसी रोते हुए बच्चे, को’ इक मुसकान दे आयें. किसी भूखे की’ झोली में...

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

सान्निध्य: आवाज़ दो हम एक हैं

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सान्निध्य: आवाज़ दो हम एक हैं:   (देश भक्ति गीत) पंद्रह अगस्‍त पर्व का यह दिन महान है. उदित हुए सूरज को’ भी यह स्‍वाभिमान है. यह उस धरा को दे रहा प्रकाश युग...

शनिवार, 1 जुलाई 2017

सान्निध्य: 2 मुक्‍तक (1 जुलाई के संदर्भ में)


सान्निध्य: 2 मुक्‍तक (1 जुलाई के संदर्भ में): नई कर प्रणाली (GST) विलासिता अब कम करें, रखें याद यह बात. दृढ़प्रतिज्ञ हो कर सभी, बचत करें दिन-रात. नव कर पद्धति आज से, भारत में आरम्...

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

नारी का मत कर अपमान

(गीतिका)
छंद- आल्‍ह
मात्रा संयोजन- 16 // 15 (चौपाई अर्धाली + चौपई)
नारी
*****
घर की यह आधारशिला है, नारी का मत कर अपमान.
इससे घर संसार मिला है, इसका हर-दम कर सम्मान.

ममता, धीरज, सेवा की है, यह मिसाल दुनिया में एक ,
नारी में माँ सर्वोपरि है, जो होती घर पर बलिदान.
जननी जन्मभूमि है अपनी, धरती नारी का प्रतिरूप,
लिए सृष्टि की भेंट अनूठी, सहती है वह हर तूफान
दुराचार, हिंसा उत्पीड़न, क्यों समाज है नहीं सचेत,
क्‍यों नर ने नारी के तन पर, दिये व्य‍था के अमिट निशान.
‘आकुल’ नारी ने न कभी भी, ललकारा नर का वर्चस्व,
जिस दिन अबला बला बनेगी, होगा नर भी लहूलुहान

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

सान्निध्य: छंद श्री सम्‍मान

सान्निध्य: छंद श्री सम्‍मान: फेसबुक साहित्‍य समूह 'मुक्‍तक लोक' का मुक्‍तक लोक तरंगिनी छंद समारोह 148 में ''छंद श्री'' सम्‍मान से सम्‍मानित किया...

मंगलवार, 7 मार्च 2017