रविवार, 9 सितंबर 2012

भारतेंदु हरिश्‍चन्‍द्र जयन्ति महोत्‍सव में विभिन्‍न राज्‍यों के साहित्‍यकार सम्‍मानित

सम्‍मान समारोह में अध्‍यक्षता कर रहे जबलपुर के आचार्य श्री भगवत दुबे और 
मुख्‍य अतिथि आकाशवाणी दिल्‍ली के केंद्र निदेशक श्री लक्ष्‍मीशंकर वाजपेयी 
कोटा। 8-9 सितम्‍बर 2012 को दो दिवसीय भारतेंदु हरिश्‍चन्‍द्र जयन्ति महोत्‍सव का शुभारंभ 8 सितम्‍बर को अभिनंदन समारोह से आरंभ हुआ। शहर के माहेश्‍वरी भवन में आयोजित अभिनंदन समारोह में विभिन्‍न राज्‍यों से आये साहित्‍यकारों को पुष्‍पगुच्‍छ दे कर अभिनंदन किया गया। प्रेस कांफ्रेंस में पधारे साहित्‍यकारों ने अपने अपने विचार प्रकट किये और ऐसे साहित्यिक समारोहों की आवश्‍यकता पर जोर दिया। जबलपुर से पधारे वयोवृद्ध साहित्‍यकार आचार्य भगवत दुबे ने कहा कि हम उम्र की उस दहलीज पर खड़े हैं जहाँ हमें अब सम्‍मानों की आवश्‍यकता नहीं, हमे द्राक्षासव और च्‍यवनप्राश की आवश्‍यकता है, जिससे हम साहित्‍यकारों के बीच उठ बैठ सकें, जिससे एक नई ऊर्जा मिलती है। अहिन्‍दीभाषी क्षेत्र में हिन्‍दी के उन्‍नयन के लिए जुझारू हैदराबाद से पधारे वयोवृद्ध साहित्‍यकार नेहपाल सिंह और आचार्य रत्‍न कला मिश्रा ने दक्षिण में हिन्‍दी के विकास के लिए किये गये उनके कार्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि हैदराबाद में अनेकों राजस्‍थानी बसे हुए हैं, किन्‍तु आज शिक्षा के क्षेत्र में समानांतर अंग्रेजी भाषा के संस्‍थानों को खोलना उनकी मजबूरी है। अंतर्राष्‍ट्रीय पत्रिका गोलकोण्‍डा दर्पण और गीत चांदनी जैसी साहित्यिक संस्‍था हैदराबाद में हिंदी के लिए संघर्षरत है। दिल्‍ली से आये आकाशवाणी के केंद्र निदेशक श्री लक्ष्‍मी शंकर वाजपेयी भी अतिव्‍यस्‍ता के बावजूद कोटा में इस साहित्‍यकार समागम के अप्रतिम महोत्‍सव में शामिल होने का अहसास रोमांचित कर गया। उन्‍होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्‍चंद्र का कोटा से कोटा से कोई सम्‍बंध नहीं था, फि‍र भी कोटा में वर्षों से उनके नाम से चली आ रही इस समर्थ संस्‍था भारतेंदु समिति वह कार्य कर रही है जो बड़ी बड़ी संस्‍थायें नहीं कर पा रही हैं। कोलकाता से पधारे हिंदी वांग्‍मय पीठ के
सम्‍मान प्रशस्‍ति पत्र, मोमेन्‍टो लिए पुष्‍पहार व शाल ओढ़े साहित्‍यकाऱ्
अध्‍यक्ष प्रोफेसर श्‍याम लाल उपाध्‍याय और साहित्‍य त्रिवेणी जैसी सशक्‍त पत्रिका के सम्‍पादक साहित्‍यकार श्री कुंवर सिंह मार्तण्‍ड ने भी यहाँ अपने विचार रखें और बांग्‍ला में साहित्‍य प्रेमी पाठकों की संख्‍या में हिंदी साहित्‍य के प्रति बढ़ रहे रुझान पर संतोष व्‍यक्‍त किया। गुवाहाटी आसाम से पधारे चंद्र प्रकाश पौद्दार ने साहित्‍यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए हमें ऐसे समारोहों में जा कर साहित्‍य को जीवंत रखने और उसे देश समाज और साहित्‍य से दूर भागते युवा पीढ़ी को साहित्‍य की आवश्‍यकता को समझाने की आवश्‍यकता फर बल दिया और कहा कि अहिंदी भाषी क्षेत्र में हिन्‍दी के उन्‍नयन से ही हम राजभाषा हिन्‍दी को राष्‍ट्रभाषा के रूप में सँजोये सपने को सच कर दिखायेंगे। अन्‍य राज्‍यों से पधारे साहित्‍यकारों ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किये। सभी ने आज देश में फैली विद्रूपता, महँगाई, भ्रष्‍टाचार पर अपने अपने तरीके से कुछ न कुछ कहा। सत्‍ता की बेशर्मी, संविधान के समानता के मौलकि अधिकारों पर आरक्षण की तलवार से कटाक्ष किया और देश में जातिवाद को बढ़ावे देने वाली वोट की राजनीति पर प्रहार किया। दिन दूनी रात चौगुनी सम्‍पत्ति के मालिक बनते जा रहे जनता के प्रतिनिधि नेताओं पर देश को कमज़ोर करने का जिम्‍मेदार ठहराया। जनता को गुमराह करने  के लिए प्रलोभनों और आश्‍वासनों की नींव पर देश को खोखला करने और गृह युद्ध जैसी बनती जा रही स्थाति के लिए साहित्‍यकारों की महती भूमिका के  लिए सभी को आह्वान किया। समारोह की अध्‍यक्षता कर रहे यूआईटी के अध्‍यक्ष रविन्‍द्र त्‍यागी ने पधारे सभी साहित्‍यकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि जो मशाल हिन्‍दी के विकास के लिए भारतेंदु ने जलाई है उसे बुझने नहीं दिया जाये, उसके लिए समिति जो कार्य कर रही है, उससे साहित्‍यकारों को ऐसे सम्‍मान समारोह आयोजित करने से एक नई दिशा,जोश और कुर कर गुजरने का मौका मिलता है। स्‍वल्‍पाहार के पश्‍चात् रात्रि को आठ बजे कवि सम्‍मेलन आरंभ हुआ।
समारोह में उपस्थित श्रोतागण साहित्‍यकार
समारोह में उपस्थित श्रोतागण साहित्‍यकार
अभिनंदन समारोह के बाद देर रात तक चले कवि सम्‍म्‍ेलन में सभी कवियों ने भ्रष्‍टाचार, समाज में फैली विद्रूपता, कन्‍या भ्रूण हत्‍या, सफाई व्‍यवस्‍था, आतंकवाद, आदि  देश की समसामयिक घटनाओं पर कवितायें कहीं व्‍यंग्‍य सुनाये । आचार्य भगवत दुबे ने 'विक्रम के कंधे लगा सत्‍ता का बेताल, प्रश्‍न मछलियाँ हो गये उत्‍तर हुए घड़ियाल', इंजन को चला रहा जिनके तन का तेल, चल कर उनके पेट पर दिल्‍ली जाती रेल'सुना कर सत्‍ता पर कटाक्ष किया। नई दिल्‍ली की टी-वी-आर्टिस्‍ट एंकर कलाकार साहित्‍यकार ममता किरण ने बेटियों पर होने वाले जुर्म पर  'एक निर्णय भी नहीं मेरे हाथ में, कोख मेरी है, लेकिन बचा लूँ तुझे' कन्‍या भ्रूण हत्‍या पर रचना सुनाई, ।
दूसरे दिन 9 सितम्‍बर को सायं पाँच बजे शहर के बीचों बीच भारतेंदु समिति के वातानु‍कूलित हॉल में सैंकड़ों साहित्‍यकारों के बीच श्री भारतेन्‍दु हरिश्‍चन्‍द्र के 162वें जन्‍मतिथि पर आयोजित भारतेंदु हरिश्‍चन्‍द्र जयन्ति महोत्‍सव  में आमंत्रित साहित्‍यकारों को विभिन्‍न सम्‍मानों से नवाज़ा गया। साहित्‍यश्री, स्‍वरसुधा श्री,आचार्य हनुमान प्रसाद सक्‍सैना स्‍मृति सम्‍मान 2012 से कोटा नगर के साहित्‍यकारों सहित कोलकाता, दिल्‍ली, आसाम, आगरा, कानपुर, जबलपुर आदि से पधारे साहित्‍यकारों को सम्‍मानित किया गया। सर्वप्रथम कोटा में

स्‍वर सुधाश्री कोटा की सुश्री रेखा राव को
हनुमान प्रसाद सक्‍सैना स्‍मृति सम्‍मान 
हैदराबाद के श्री नेहपाल वर्मा को 

भारतेंदु समिति के स्‍थापक की स्‍मृति में दिये जाने वाले हनुमान प्रसाद सक्‍सैना स्‍मृति सम्‍मान-2012 हैदराबाद के श्री नेहपाल वर्मा को  दे कर सम्‍मानित किया गया। इसके पश्‍चात् संगीत के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाली एक नारी प्रतिभा को दिये जाने वाले पुरस्‍कार व सम्‍मान 'स्‍वर सुधाश्री' के लिए इस बार टी-वी- सीरियल 'बालिका वधु' के लिए टाइटल गीत 'छोटी सी उमर परणाई बाबो सा' और प्रख्‍यात मांड गीत 'केसरिया बालम आओ रे , पधारे म्‍हारे देस' एवं हाल ही आरंभ हुए सीरियल रामायण में भी रवींद्र जैन के साथ रामायण की चौपाइयाँ गाने वाली एवं सैंकड़ों राजस्‍थानी लोक गीतों के एलबम जिनके निकले हैं, कोटा की ही मशहूर  गायिका 'सुश्री रेखा राव' को इस साल का यह सम्‍मान दिया गया। शेष सभी साहित्‍यकारों को 'साहित्‍यकार श्री' सेसम्‍मानित किया गया। सम्‍मान में पुष्‍प माला पहना कर प्रशस्ति पत्र,श्रीफल, शॉल और भारतेंदु हरिश्‍चंद्र के चित्र वाला मोमेंटो भेंट दिया गया। समारोह में आगरा के रामवीर शर्मा, कोटा के हितेश व्‍यास, कोटा के श्री प्रकाश नारायण मिश्र, हैदराबाद से ही आचार्य रत्‍नकला मिश्रा, गौहाटी असम से श्री चंद्रप्रकाश पौद्दार, दिल्‍ली से श्री लक्ष्‍मी शंकर वाजपेयी, कोटा के श्री भगवत सिंह जादौन मयंक, अटरूँ बारां, राजस्‍थान के श्री गोपाल नामेंद्र,जयपुर अवध विषादी,नई दिल्‍ली से श्रीमती ममता किरण, आगरा से  डा0 रुचि चतुर्वेदी,  नई दिल्‍ली से श्री आमेद कुमार, कोलकाता से कुंवर वीर सिंह मार्तण्‍ड, प्रोफेसर श्‍याम लाल उपाध्‍याय, जबलपुर से आचार्य भागवत दुबे आदि को सम्‍मानित किया गया।

बुधवार, 5 सितंबर 2012

सान्निध्य: शिक्षक

सान्निध्य: शिक्षक:   जो शिक्षित करता हम उसको शिक्षक कह सकते हैं। जो दीक्षित करता हम उसको शिक्षक कह सकते है। दिशा दिखाये, दे दृष्‍टांत, आगाह करे,...

सोमवार, 3 सितंबर 2012

सान्निध्‍य का Favicon जारी

ब्‍लॉग 'सान्निध्‍य' ने अपना Favicon जारी किया है। यह लोगो 'सान्निध्‍य' के सभी ब्‍लॉग 'सान्निध्‍य', 'सान्निध्‍य सेतु', 'सान्निध्‍य दर्पण', 'सान्निध्‍य स्रोत' सब की लिंक पर दिखाई देगा। 'आकुल' ने बताया कि फेवआइकन ब्‍लॉग की एक पहचान है। विश्‍व के ब्‍लॉगर लोगोस  में उसे शामिल किया जाता है।- सान्निध्‍य टीम

बुधवार, 29 अगस्त 2012

'आकुल' के नये ब्‍लॉग 'सान्निध्‍य दर्पण' का शुभारंभ

कोटा। 'सान्निध्‍य', 'सान्निध्‍य सेतु', 'सान्निध्‍य स्रोत' ब्‍लॉग की शृंखला में 'सान्निध्‍य दर्पण' का शुभारम्‍भ 28 अगस्‍त 2012 से हो गया। अपने प्रिय कवियों की रचनाओं का संकलन, उनकी श्रेष्‍ठ रचनायें, गोष्‍ठी में उनकी शिरकत को यादों के झरोखे के रूप में प्रस्‍तुत करने के लिए ब्‍लॉग के प्रबंधक 'आकुल' ने इसकी उपयोगिता पर  प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत दिनों से कोशिश थी कि एक ऐसा ब्‍लॉग आरंभ करूँ जिसमें भिन्‍न भिन्‍न स्‍थानों के कवियों की रचनायें हों। ये रचनायें काव्‍य गोष्ठियों से ली गयी हों, अन्‍य ब्‍लॉग्‍स से आयात की गयी हों। रचनायें नई व पुरानी कुछ भी हो सकती हैं। उसे सुंदर स्‍वरूप में प्रदर्शित करने के लिए चित्र अवश्‍य उपलब्‍ध हों, ताकि सोने पर सुहागा। उन्‍होंने अपने अन्‍य ब्‍लॉग से इसकी उपादेयता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि *सा‍न्निध्‍य* उनका स्‍वयं की रचनाओं का संकलन है। *सान्निध्‍य सेतु* साहित्‍य जगत् के साहित्‍य, सांस्‍कृतिक समाचारों का चिट्ठा है। *सान्निध्‍य स्रोत* दाक्षिणात्‍य वैल्‍लनाडु ब्राह्मणों की सजातीय गतिविधियों का अनियमित चिट्ठा है। अन्‍य रचनाकारों (अभी केवल कवियों) की साहित्यिक अभिरुचि विशेषकर काव्‍य सृजन को स्‍थान दे कर उनके लिए एक ब्‍लॉग मंच *सान्निध्‍य दर्पण* के रूप में आरंभ किया है। वैसे इस दिशा में कई ब्‍लॉग कार्य कर रहे हैं। मैं अपने ब्‍लॉग में रचनाओं के साथ कला पक्ष को भी प्रस्‍तुत करना चाहता हूँ, जिससे उनकी रचनायें, उनकी गतिविधियों को पाठक पढ़ सकें। अभी इसमें केवल उनकी कविता और उनसे जुड़े संस्‍मरणों से सम्‍बंधित चित्रों को प्रदर्शित करना ही योजना में हैं। उन्‍होंने कहा कि अन्‍य विधाओं के साथ विस्‍तृत विवरण का लेखा जोखा उनकी भावी योजनाओं में सम्मिलित है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि प्रतिदिन एक न एक कवि को उनके इस ब्‍लॉग में स्‍थान मिले ऐसा प्रयास वे करेंगे। इस शृंखला में उन्‍होंने सबसे पहले 28-08-2012 को कोटा के वरिष्‍ठ जनकवि *श्री रघुनाथ मिश्र* को स्‍थान दिया है और आज स्‍थान पाया है कोटा के ही सूफ़ी शायर  *डा0 फ़रीद अहमद 'फ़रीदी'*। अंत में उन्‍होंने कहा कि काव्‍य की हर विधा को समर्पित यह उनकी वर्षों की अभिलाषा का मूर्त रूप है।-संवाददाता, सान्निध्‍य टीम.

शनिवार, 25 अगस्त 2012

साहित्‍यकार-5 में रघुनाथ मिश्र और ‘आकुल’

निरुपमा प्रकाशन मेरठ की ‘साहित्‍यकार’ प्रकाशन शृंखला की पाँचवी कड़ी में पाँच कवियों में कोटा के वरिष्‍ठ साहित्‍यकार और जनकवि विद्या वाचस्‍पति श्री रघुनाथ मिश्र और सम्‍पादक, कवि, साहित्‍यकार साहित्‍य शिरोमणि श्री गोपाल कृष्‍ण भट्ट ‘आकुल’ को शामिल किया गया है। मुकेश ‘नादान’ सम्‍पादित 126 पृष्ठीय पुस्‍तक में श्री मिश्र और आकुल के अलावा तीन अन्‍य कवि कोटकला, बुलंदशहर के प्रख्‍यात लोक कवि श्री सरन ‘मधुकर, पुराण वर्णित प्रलय के बाद पुराण वर्णित सृष्टि की शुरुआत जहाँ से हुई वह वाराह अवतार की गंगा नदी के तट की भूमि शूकर  क्षेत्र के नाम से प्रख्‍यात सौरों निवासी श्री नीरज तिवारी ‘हउआ’ और बी0एच0ई0एल0 (भेल) में कार्यरत प्रख्‍यात कवि सुधीर कुमार 'चक्र' को सम्मिलित किया गया है।

इस पुस्‍तक में कवियों की अपनी प्रतिनिधि एवं सर्वश्रेष्‍ठ 10 से 15 रचनायें सम्मिलित की गयी हैं। जैसे श्री मिश्र की प्रतिनिधि कविता ‘कोयल की कूक मयूर की थिरक’, ‘मधुकर’ की ‘पहले खूब हँसा करता था, अब मैं केवल चुप रहता हूँ, चक्र की ‘चटकनी’ 'वसीयत' और ‘कवि की उम्र’, ‘हउआ’ की ‘रिश्‍ते’ और ‘आकुल’ की ‘शिक्षा ऐसी हो’, दृष्टि दिवस, अनगिन दीप जले, कितने रावण मारे अब तक आद‍ि इसमें शामिल हैं। कवियों ने काव्‍य की सभी विधाओं में कलम चलाई है। मुक्‍तक, दोहे, देशभक्ति, शृंगार, लम्‍बी कवितायें, अतुकात्‍मक आदि विधाओं की गागर में सागर समाई इस पुस्‍तक में शोधग्रंथ के लिए प्रयोग में लिये जा सकने वाली सामग्री है। इसमें दर्शन है, व्‍यंग्‍य है, समसामयिक घटनाचक्र है, बेरोजगारी, भ्रष्‍टाचार पर आक्रोश है तो माँ और नारी की स्थिति का मार्मिक चित्रण है। त्रुटि रहित मुद्रण और श्री नादान की पैनी दृष्टि से सम्‍पदित यह पुस्‍तक हर वर्ग के पाठक को पठनीय है।   
इस प्रकाशन की कुछ विशेषतायें इस प्रकाशन की ही उपलब्धि मानी जायेगी। सुंदर कलेवर की हार्डबाइंडिग  लाइब्रेरी संस्‍करण इस पुस्‍तक पर पाँचों कवियों के मुखाकृति को प्रकाशित किया जाता है। व्‍यावसायिक दृष्टिकोण से बनाई गयी इस पुस्‍तक में आईएसबीएन क्रमांक भी दिया गया है। 250 रु0 मूल्‍य की यह पुस्‍तक श्री ‘नादान’ के निरुपमा प्रकाशन की यह पु‍स्‍तक मेरठ से प्रकाशित और बी0 के0 आफसेट, शाहदरा दिल्‍ली में मुद्रित है।

कोटा, 25-8-2012   

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

हिन्‍दी दिवस पर 14 सितम्‍बर को हाड़ौती के कवि 102 वर्षीय डा0 भ्रमर सम्‍मानित होंगे। सम्‍मान उन्‍हें उनकी सद्य: प्रकाशित पुस्‍तक 'भ्रमर उत्‍सव' पर


14 सितम्‍बर हिन्‍दी दिवस पर हाड़ौती के प्रख्‍यात कवि 102 वर्षीय डा0 भँवर लाल तिवारी ‘भ्रमर’ को पं0 ब्रज बहादुर पाण्‍डेय स्‍मृति सम्‍मान से  अलंकृत किया जायेगा। बहराइच उत्‍तर प्रदेश से स्‍व0 पंडित ब्रजहादुर पाण्‍डेय के पुत्र प्रख्‍यात ग़ज़लकार, कवि और साहित्‍यकार डा0 अशोक कुमार ‘गुलशन’ उन्‍हें भवानीमण्‍डी, जिला झालावाड़ (राजस्‍थान) उनके गृहनिवास पर शाल, प्रशस्ति पत्र और पत्र पुष्‍प प्रदान करेंगे। श्री तिवारी जी को उनकी सद्य: प्रकाशित पुस्‍तक ‘भ्रमर उत्‍सव’ पर यह सम्‍मान प्रदान किया जायेगा। श्री तिवारीजी हाड़ौती की झालावाड़ रियासतकाल के एक मात्र कवि हैं, जो आज भी अपनी साहित्यिक ऊर्जा के सहारे अपनी दैनंदिनी में संलग्‍न हैं। 
भ्रमर उत्‍सव’ डा0 तिवारी की चौथी पुस्‍तक है। यह उनके जीवन भर की सृजित शेष रचनाओं का संग्रह है। इन रचनाओं को हाड़ौती के ही जनकवि श्री गोपाल कृष्‍ण भट्ट ‘आकुल’ ने सम्‍पदित किया है। डा0 भ्रमर हाड़ौती के ऐसे लाड़ले कवि हैं जो ब्रजभाषा में भी अधिकार के साथ रचना करते है। उनकी पुस्‍तक ‘भ्रमर उत्‍सव’ में गीत, ग़ज़ल, छन्‍द, कविताओं की बेहतरीन रचनाओं का समावेश है। 120 पृष्‍ठीय उनके काव्‍य संग्रह को कोटा की फ्रेण्‍ड्स हेल्‍पलाइन प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। पृथ्‍वी पुत्र सम्‍मान, काव्‍य महारथी सम्‍मानोपाधि, साहित्‍य श्री, मध्‍य प्रदेश हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन आदि द्वारा लगभग 21 पुरस्‍कारों और सम्‍मानोपाधियों से सम्‍मानित डा0 भ्रमर अब भवानीमण्‍डी में ही विश्राम कर रहे है। उनके द्वारा रचित अन्‍य तीन पुस्‍तकें हैं ‘ब्रजभाषा साहित्‍यकार दर्पण’, ‘अर्पण’ और ‘भँवर गुंजार’।
कोटा-23-08-2012