रविवार, 20 नवंबर 2016
सान्निध्य स्रोत: तैलंगकुलम् का नवम्बर-16-जनवरी-17 अंक प्रकाशित
सान्निध्य स्रोत: तैलंगकुलम् का नवम्बर-16-जनवरी-17 अंक प्रकाशित: नवम्बर:2016-जनवरी:2017 का अंक We're sorry, your browser doesn't support IFrames. You can still visit this item. , however. E...
शनिवार, 19 नवंबर 2016
ई-पत्रिका 'जय विजय' अक्टूबर 2016 एवं नवम्बर 2016 में 'आकुल'
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अक्टूबर 2016 का जय-विजय अंक |
ई पत्रिका 'जय विजय' के माह अक्टूबर के अंक में 'गौरैया' पर बाल गीत पृष्ठ 22 पर एवं नवम्बर 2016 के अंक में आकुल की गीतिका ''हमारे देश पर रक्षा की जब जब बात आई है। जवानों ने वतन के वास्ते जाँँ तक लुटाई है'' पृष्ठ 12 प्रकाशित हुई है। अंतिम पृष्ठ पर 'अहिसास' द्वारा विद्योत्तमा पुरस्कार के साथ साथ 'आकुल' की सद्य प्रकाशित पुस्तक 'जब से मन की नाव चली' का लोकार्पण हुआ था, उसके समाचार भी प्रकाशित हुए हैं.
शुक्रवार, 18 नवंबर 2016
जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय एवं प्रान्तीय सचिव श्री राजेंद्र साईवाल नहीं रहे
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जिला सम्मेलन में साईवाल उद्बोधन देते हुए |
अन्य लेखकों में शोक की लहर दौड़ गयी.उपलव्ध लेखकों की ,तुरत फुरत की गयी एक शोक सभा में उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी गयी.संघ के जिलाध्यक्ष, प्रांतीय कमिटी व् राष्ट्रीय परिषद् के सदस्य डॉ.रघुनाथ
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दिसम्बर 2005 में जलेस के जिला सम्मेलन में श्री साईवाल मध्य में लिखते हुए. साथ में हैं किसान नेता श्री रवींदजी, प्रख्यात साहित्यकार श्री विजयवर्गीय, एवं आकुल |
मंगलवार, 15 नवंबर 2016
स्व. लज्जाराम मेहता समारोह सम्पन्न
पहला स्व. लज्जाराम मेहता स्मृति पुरस्कार श्री
‘मयूख’ को. पं0 लज्जाराम पर श्रीमती संतोष नागर की लिखी पुस्तक का भी
लोकार्पण.
कोटा.
नेहरू जयंति 14 नवम्बर को शहर के प्रख्यात रोटरी संस्थान द्वारा प्रायोजित बूँदी के प्रख्यात
साहित्यकार पत्रकार स्व. लज्जाराम मेहता स्मृति सम्मान समारोह दोपहर तीन बजे
कोटा बूँदी के प्रख्यात साहित्यकारों विद्वानों के साक्ष्य में आरंभ हुआ. इस
कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल में थे शहर के जाने माने श्रेष्ठि श्री कैलाश चंद्र सर्राफ, अध्यक्ष,
समारोह के मुख्य अतिथि सम्भागीय आयुक्त श्री रघुवीर सिंह मीणा, कोटा विश्वविद्यालय
के पत्रकारिता विभाग के एसोएिट प्रोफेसर डा0 सुबोध अग्निहोत्रि, स्व. लज्जाराम
मेहता पर लिखी पुस्तक की लेखिका श्रीमती संतोष नागर, पहले स्व. लज्जाराम मेहता स्मृति सम्मान प्राप्त
करने वाले कोटा के साहित्य रत्न श्री बशीर मोहम्मद ‘मयूख’ और प्रख्यात साहित्यकार
जिन्होंने इस कार्यक्रम को आयोजित करवाया वे डा0 औंकारनाथ चतुर्वेदी थे.
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समारोह का शुभारंभ सरस्वती पूजन और दीप प्रज्ज्वलन करते संभागीय आयुक्त |
सरस्वती
वंदना के पश्चात् श्री औंकारनाथ चतुर्वेदी एवं अन्य वरिष्ठ साहित्यकारों ने
सभी मंचासीन अतिथियों को माला पहना कर स्वागत एवं अभिनंदन किया. संयोजक श्री अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि हिन्दी की यात्रा जो 18वीं
शताब्दी से गद्य लेखन की परम्परा विधिवत् रूप से शुरू हुई जिसके आदि प्रवर्तक के
रूप में भारतेंदु हरिश्चंद्र को हम अच्छी तरह जानते हैं, उस परम्परा, गद्य लेखन
की शृंखला को आगे बढ़ाने में देवकीनंदन खत्री के साथ-साथ उस समय अगर किसी उपन्यासकार
ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया उनमें स्व. लज्जाराम मेहता का नाम सर्वप्रथम
है. आचार्य रामचरण शुक्ल ने अपने प्रमुख ग्रंथ 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' में उनका
महत्वपूर्ण उल्लेख किया है, बाद में कालांतर में पत्रकारिता पर पुस्तकें आईं, चाहे वे वेदप्रताप वैदिक की पुस्तक रही हो या आलोक मेहता की पुस्तक या अन्य
दूसरे पत्रकार की जिन्होंने पत्रकारिता पर पुस्तक लिखीं हैं, लज्जाराम मेहता का
उल्लेख पत्रकार के रूप में अवश्य किया है. अपने जीवन काल में उन्होंने अनेक
उपन्यासों की रचना की, इतिहास के महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना उन्होंने की, उस समय
के ‘सर्वप्रिय’ अखबार का सम्पादन उन्होंने किया, और तमाम साहित्यिक और साहित्येतर
जुड़ी हुई गतिविधियाँ हैं, उनमें वे संलग्न रहे, यह अलग बात है कि आगे उनके
साहित्यिक व पत्रकारिता के योगदान को इतिहास में बहुत ज्यादा रेखांकित नहीं किया
गया, इसलिए हमारे डा0 साहब का तो स्टाइल ही यही है कि जिन्हें कोई रेखांकित नहीं
करता उनका बीड़ा वे उठा लेते हैं, आपको स्मरण होगा कि आपने कुछ दशक पूर्व बूँदी
के ही सूर्यमल्ल मिश्रण पर भी उन्होंने बहुत बड़ा कार्यक्रम सम्पन्न करवाया था,
जिसमें देश के ख्यातनाम साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर, सोहनलाल द्विवेदी उपस्थित हुए थे और पिछले कई वर्षों से उन पर एक डाक टिकिट भी जारी करवाया जाना था, किंतु राज बदला तख्त
बदला और वह कार्य अधूरा रह गया. उसी
शृंखला में वे प्रयासरत रहे हैं. स्व0 लज्जाराम पर भी डाक टिकिट जारी करवाने का
कार्य अभी पाइप लाइन में हैं, यह प्रोजेक्ट माननीय संभागीय आयुक्त के साथ वार्ता
कर पुन: आरंभ किया गया है. डा. अतुल ने कहा कि पिछले दिनों डा0 उषा झा ने उन्हें
श्रीमती संतोष नागर की पुस्तक जो ''स्व. लज्जाराम जी की आपबीती'' उन्होंने पढ़ने
को मिली उसे पढ़ कर महूसूस हुआ कि उन दिनों कितना संघर्ष किया जाता था, एक जगह वे
लिखते हैं कि एक बार माउंट आबू में थे वे रोज 1500 फुलस्केप कागज लिखडाले थे, या
तो मैंने ओशो आचार्य रजनीश के बारे में पढ़ा है कि वे 2100 पृष्ठ रोज पढ़ा करते
थे, तब 1 घंटे का उद्बोधन दिया करते थे. मेरे कहने का तात्पर्य है कि पहले कितना
पढ़ता-लिखना पड़ता था, जब आज की तरह कम्प्यूटर, टाइपराइटर आदि जैसी सुविधायें
नहीं थीं. वे दो दो तीन तीन उपन्यासों को एक साथ लिखा करते थे, सभी मूल लेखक के भाव
थे, कहीं से कोई भाव या विषय हरण नहीं किया लिए हुए नहीं थे. डा0 अतुल ने इस समूचे
कार्यक्रम का क्या उद्देश्य रहा है, क्या निमित्त रहा है इसके पीछे, हम क्या
चाहते हैं इस कार्यक्रम के माध्यम से, इसे रेखांकित करने के लिए और विषय प्रवर्तन
के साथ साथ सम्माननीय अतिथियों के स्वागत के लिए भी दो शब्द कहने के लिए भी डा. औंकारनाथ चतुर्वेदी को आमंत्रित किया.
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विषय प्रवर्तन के अंतर्गत समारोह के औचित्य पर व्याख्यान देतेे समारोह के आयोजक डा0 औंकारनाथ चतुर्वेदी |
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समारोह संचालक डा. अतुल चतुर्वेदी |
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पं0 लज्जाराम मेहता पर लिखी पुस्तक
की लेखिका संतोष नागर का परिचय देती प्राध्यापिका डा0 उषा झा |
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पुस्तक का परिचय देती लेखिका
डा. संतोष नागर |
अपरिहार्य
कारणों से प्रशासनिक बैठक में उपस्थित होने के लिए जाने से पूर्व बीच में ही सम्भागीय
आयुक्त श्री रघुवीर सिंह मीणा एवं अन्य मंचासीन अतिथियों के करकमलों से श्रीमती
संतोष नागर की पुस्तक ‘पं0 लज्जाराम मेहता एवं उनकी आपबीती’’ का लोकार्पण किया
गया. श्री मीणा ने अपने संक्षिप्त भाषण में कहा कि मैं अनेकों जिलों में अपने
प्रशासनिक पदों पर रहा हूँ, वहाँ इक्के दुक्के साहित्यकारों व साहित्यिक
कार्यक्रमों में उठ बैठ हुई है, किन्तु कोटा जैसा साहित्य वैभव उन्होंने कहीं
नहीं देखा, यहाँ साहित्यकारों का भण्डार है, मानो यहाँ साहित्य की सरिता बहती
है. उन्होंने बताया कि साहित्य
हमारे इतिहास की धरोहर हैं, बूँदी के इन
दो महापुरुषों के लिए श्री औंकारनाथजी ने जो आयोजन किये हैं वे सराहनीय हैं, उनके
प्रोजेक्ट पर हम कार्य कर रहे हैं, शीघ्र ही प्रशासनिक स्तर पर इसे प्रभावशाली
तरीके से निर्णय लिया जाएगा और शीघ्र ही इसमें सफलता मिलेगी, ऐसी आशा है. जाने से
पूर्व श्री मीणा का श्री औंकारनाथजी चतुर्वेदी द्वारा शॉल, श्रीफल दे कर सम्मानित
किया गया.
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कोटा वि.वि. के पत्रकारिता विभाग के एसो. प्रो0 सुबोध अग्निहोत्रि
को सम्मानित करते अतिथि बायें से डा. औंकारनाथ चतुर्वेदी, डा. अग्निहोत्रि, श्री मयूख, श्री सर्राफ, डा. नागर, डा. ऊषा झा |
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श्रीफल व शॉल उढ़ा कर श्री मयूख को सम्मानित करते अतिथि बायें से डा. उषा झा, डा. अतुल चतुर्वेदी, डा. औंकारनाथ चतुर्वेदी, श्री मयूख, श्री कैलाशचंद्र सर्राफ, डा. संतोष नागर |


कार्यक्रम
में खचाखच भरे सभागार में शहर के सभी प्रख्यात साहित्यकारों की उपस्थित गौरवमयी
रही. ख्यात नाम साहित्यकार श्री नंदन चतुर्वेदी, श्री महेंद्र नेह, श्री हितेष
व्यास, श्री शकूर अनवर, श्री ओम नागर, चाँद शेरी, रामेश्वर शर्मा 'रम्मू भैया', आकुल, श्री नरेंद्र चक्रवर्ती एवं अन्य साहित्यकारों
के साथ-साथ राजकीय महाविद्यालय, जे.डी.बी. महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एवं शहर
के गणमान्य नागरिकों के मध्य समारोह पूर्ण गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ. अंत
में फोटो सेशन के बाद अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.
मंगलवार, 8 नवंबर 2016
सान्निध्य स्रोत: तैलंगकुलम् समाज का षष्ठ लाइफ टाइम अचीवमेंट एवं प्...
सान्निध्य स्रोत: तैलंगकुलम् समाज का षष्ठ लाइफ टाइम अचीवमेंट एवं प्...: बाल प्रतिभाओं, संगीतकार, चित्रकार,साहित्यकारों को भी विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। 3 पुस्तकों का भी लोकार्पण तैलंगकुलम...
सोमवार, 7 नवंबर 2016
तैलंगकुलम् के प्रतिभा सम्मान समारोह में 'आकुल' केे गीत संग्रह 'नवभारत का स्वप्न सजाएँँ' का लोकार्पण हुआ
कोटा। 6 नवम्बर को सूचना केंद्र जयपुर में एक भव्य आयाजन में अनेकों प्रतिभाओं और अनेक, शोधार्थियाें, संगीतकारों, साहित्यकारों, चित्रकारों, पत्रकारों को सम्मानित किया गया। साथ ही तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया. समारोह का मुख्य आकर्षण थीं लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कारों से नवाज़े गये समाज के प्रबुद्ध मनीषियों और स्व0 रामादेवी स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत श्रीमती राधा देवी (बुलबुलजी) को पुरस्कृत किया जाना था. श्रीमती राधादेवी प्रख्यात सितारवादक स्व0 पं0 शशिमोहन भट्ट की पत्नी हैं।

श्री 'आकुल' केे गीत संग्रह 'नवभारत का स्वप्न सजाएँँ' का लोकार्पण उपरोक्त दो पुस्तकों के साथ ही मंचाासीन समारोह अध्यक्ष संस्कृत मनीषी देवर्षि पं. कलानाथ शास्त्री, मुख्य अतिथि पूर्व जिला एवं सेशन जज श्री मुरलीधर गोस्वामी, पूर्व न्यायाधीश श्री विनय गोस्वामी, तैलंगकुलम् के अध्यक्ष श्री यदुनाथ भट्ट, उपाध्यक्ष श्री रवि गोस्वामी, प्रख्यात पत्रकार एवं उद्धोषक श्री प्रभात गोस्वामी एवं लेखक त्रय के द्वारा सम्पन्न किया गया. श्री 'आकुल' ने सद्य प्रकाशित नवगीत संग्रह 'जब से मन की नाव चली' भी सभी मंचासीन अतिथियों को भेंट की.


उन्होने बताया कि यह दोनों पुस्तक तैलंगकुलम् के प्रकाश स्तम्भ अनुष्टुप प्रकाशन, जयपुर से ही प्रकाशित हुई हैं. पुुस्तक के लोकार्पण के ऊहापोह के चलते विलम्ब होने पर 'आकुल' ने बताया कि नवम्बर में प्रतिभा सम्मान समारोह की घोषणा होने पर इस पुस्तक का लोकार्पण होना तय हो गया, किन्तु विलम्ब के कारण यह पुस्तक राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो जाने के कारण एक औपचारिकता स्वरूप यह प्रकाशक द्वारा लोकार्पित किया जाना आवश्यक समझा गया. इस गीत संग्रह केे लिए अखिल हिन्दी साहित्य सभा (अहिसास) नाशिक द्वारा 16 अक्टूबर को नाशिक में एक भव्य समारोह में श्री 'आकुल' सम्मानित किया गया. इसी कार्यक्रम में उनके सद्य प्रकाशित नवगीत संग्रह 'जब से मन की नाव चली' का भी लोकार्पण किया गया. 'आकुल' की पुस्तक के बारे में संचालक द्वारा वक्तव्य पढ़ा गया। बताया गया 'सपने वे नहीं होते, जो हम सोते हुए देखते हैं. पने वे होते हैं, जो हमें सोने नहीं देते, पर सुनहरे सपनों को सँजोए हुए रखते हैं. इसी हुंकार और टंकार के साथ आकुलजी का यह गीत संग्रह पाठकों के बीच है. इस संग्रह में 48 गीतों का विविधवर्णी समावेश है. ये गीत इस मन्तव्य का भी समर्थन करते हैं कि यदि वर्तमान को सुधारा जाय तो भविष्य अपने आप सुधर जाएगा. यही जीवन मार्ग राजमार्ग सिद्ध होगा. इन गीतों में चुनौतियों के प्रतिकार का सामर्थ्य दिखाई देता है. गीतकार का मनना है कि चुनौतियाँँ शाश्वत हैा, सदा रहेंगी. इनका सामना करना ही संघर्ष है. हौसला और कर्तव्यपरायणता इसकी प्राथमिकता है.
प्रस्तुति- आकुल
तैलंगकुलम् के प्रतिभा सम्मान समारोह में 'आकुल' केे गीत संग्रह 'नवभारत का स्वप्न सजाएँँ' का लोकार्पण हुआ
कोटा। 6 नवम्बर को सूचना केंद्र जयपुर में एक भव्य आयाजन में अनेकों प्रतिभाओं और अनेक, शोधार्थियाें, संगीतकारों, साहित्यकारों, चित्रकारों, पत्रकारों को सम्मानित किया गया। साथ ही तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया. समारोह का मुख्य आकर्षण थीं लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कारों से नवाज़े गये समाज के प्रबुद्ध मनीषियों और स्व0 रामादेवी स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत श्रीमती राधा देवी (बुलबुलजी) को पुरस्कृत किया जाना था. श्रीमती राधादेवी प्रख्यात सितारवादक स्व0 पं0 शशिमोहन भट्ट की पत्नी हैं।

श्री 'आकुल' केे गीत संग्रह 'नवभारत का स्वप्न सजाएँँ' का लोकार्पण उपरोक्त दो पुस्तकों के साथ ही मंचाासीन समारोह अध्यक्ष संस्कृत मनीषी देवर्षि पं. कलानाथ शास्त्री, मुख्य अतिथि पूर्व जिला एवं सेशन जज श्री मुरलीधर गोस्वामी, पूर्व न्यायाधीश श्री विनय गोस्वामी, तैलंगकुलम् के अध्यक्ष श्री यदुनाथ भट्ट, उपाध्यक्ष श्री रवि गोस्वामी, प्रख्यात पत्रकार एवं उद्धोषक श्री प्रभात गोस्वामी एवं लेखक त्रय के द्वारा सम्पन्न किया गया. श्री 'आकुल' ने सद्य प्रकाशित नवगीत संग्रह 'जब से मन की नाव चली' भी सभी मंचासीन अतिथियों को भेंट की.


उन्होने बताया कि यह दोनों पुस्तक तैलंगकुलम् के प्रकाश स्तम्भ अनुष्टुप प्रकाशन, जयपुर से ही प्रकाशित हुई हैं. पुुस्तक के लोकार्पण के ऊहापोह के चलते विलम्ब होने पर 'आकुल' ने बताया कि नवम्बर में प्रतिभा सम्मान समारोह की घोषणा होने पर इस पुस्तक का लोकार्पण होना तय हो गया, किन्तु विलम्ब के कारण यह पुस्तक राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो जाने के कारण एक औपचारिकता स्वरूप यह प्रकाशक द्वारा लोकार्पित किया जाना आवश्यक समझा गया. इस गीत संग्रह केे लिए अखिल हिन्दी साहित्य सभा (अहिसास) नाशिक द्वारा 16 अक्टूबर को नाशिक में एक भव्य समारोह में श्री 'आकुल' सम्मानित किया गया. इसी कार्यक्रम में उनके सद्य प्रकाशित नवगीत संग्रह 'जब से मन की नाव चली' का भी लोकार्पण किया गया. 'आकुल' की पुस्तक के बारे में संचालक द्वारा वक्तव्य पढ़ा गया। बताया गया 'सपने वे नहीं होते, जो हम सोते हुए देखते हैं. पने वे होते हैं, जो हमें सोने नहीं देते, पर सुनहरे सपनों को सँजोए हुए रखते हैं. इसी हुंकार और टंकार के साथ आकुलजी का यह गीत संग्रह पाठकों के बीच है. इस संग्रह में 48 गीतों का विविधवर्णी समावेश है. ये गीत इस मन्तव्य का भी समर्थन करते हैं कि यदि वर्तमान को सुधारा जाय तो भविष्य अपने आप सुधर जाएगा. यही जीवन मार्ग राजमार्ग सिद्ध होगा. इन गीतों में चुनौतियों के प्रतिकार का सामर्थ्य दिखाई देता है. गीतकार का मनना है कि चुनौतियाँँ शाश्वत हैा, सदा रहेंगी. इनका सामना करना ही संघर्ष है. हौसला और कर्तव्यपरायणता इसकी प्राथमिकता है.
प्रस्तुति- आकुल
शुक्रवार, 4 नवंबर 2016
21 प्रतिभाएँँ सम्मानित होंगी एवं 3 पुस्तकों के लोकार्पण भी





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