लता मंगेशकर एक नाम, एक किंवदंती, एक हस्ती, मील का एक पत्थर, भारत का गौरव, भारत रत्न लताजी का बॉलिवुड नहीं,देश नहीं विश्व आज इस अजीमोशान शख्सियत का 83वाँ जन्म दिन मना रहा है। 28 सितम्बर 1929 को जन्मी लता का फिल्मी गीतों का सफ़र 1942 से शुरु हुआ। 1948 से 1974 तक 25000 से अधिक 20 भारतीय भाषाओं में अपना स्वर देने वाली स्वर कोकिला लता दीदी के बारे में कुछ लिखना सूरज को दिया दिखाना होगा। 1974 से 1991 के दौरान सर्वाधिक रिकॉर्डिंग्स के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है। आज भी लता का गाया गीत ताजातरीन 2012 की फिल्म 'हिरोइन' में 'क्यूँ यहाँ होता है' आप सुन सकते है। लता जी के बारे में इतना कुछ लिखा हुआ है कि एक दिन नहीं, सौ दिन नहीं, बरसों बरस पढ़ते रहें तो भी उनके बारे में नई नई बातें पढ़ने का सिलसिला चलता रहेगा। सादा जीवन और उच्च विचारों की लता के बारे में दूसरे कलाकारों के शोषण के भी अफसाने सुनने को मिले, लेकिन 'यूँही कोई सितारे नहीं तोड़ लाता, फ़लक के चाँद को भी उसने मनाया होगा'- (आकुल) । लताजी को जन्मदिन की ढेरों बधाइयाँ।
शुक्रवार, 28 सितंबर 2012
रविवार, 23 सितंबर 2012
हाड़ौती के शतायुपार कवि डा0 भ्रमर को उनकी पुस्तक ‘भ्रमर उत्सव’ पर ‘पं0 ब्रज बहादुर पाण्डेय स्मृति सम्मान’ और ‘धरती रत्न' सम्मान
जनकवि डा0 रघुनाथ मिश्र के घर सम्मान समारोह और काव्य गोष्ठी
‘पादपों को बरगदों से दूर रहने दीजिए । अंकुरों को चिलचिलाती धूप सहने दीजिए’-निर्मल पाण्डे


इस अवसर पर काव्यगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। अल्पाहर से पूर्व गोष्ठी का संचालन जनकवि ‘आकुल’ने और बाद में शायर फर्रूख नदीम ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ पुखराज के देशभक्ति गीत ‘उन्नत भाल किया जिन्होंने उन शहीदों को अभिनन्दन’ से हुआ। गोष्ठी में वेद प्रकाश परकाश ने बुलंद आवाज़ में ग़जल सुनाई-‘प्यार का कुछ सिला दीजिए, मेरा दिल ही दुखा दीजिए। लड़खड़ाने लगे हैं कदम, अब तो अपना पता दीजिए’ और अपनी प्रतिनिधि ग़ज़ल ‘इक तेरा इशारा नहीं है, वर्ना क्या कुछ हमारा नहीं है, उसके हम वो हमारा नहीं है, जिसको वतन प्यारा नहीं है।' डा0 निर्मल पाण्डे ने अपनी हिंदी गजल सुना कर महफिल को ऊँचाइयाँ प्रदान की- ‘पादपों को बरगदों से दूर रहने दीजिए, अंकुरों को चिलचिलाती धूप सहने दीजिए’ एहतेशाम अख्तर पाशा ने कुछ शेर और एक ग़ज़ल सुनाई-‘मन की पुस्तक में मैंने लिखा था,हाँ अभी तक वो नाम बाकी है। मार सकता नहीं मुझे रावण, जब तलक दिल में राम बाकी है।' दूसरे मुक्तक से उन्होंने दाद बटोरी-‘माहौल से हम लोग बगावत नहीं करते,मजलूम की हम लोग हिमायत नहीं करते,उन्होंने एक ग़ज़ल भी सुनाई-कहानी दर्द की मैं जिन्दगी से क्या कहता। ये दर्द उसने दिया है उसी से क्या कहता।' फर्रुख नदीम ने भी अपनी गजल से खूबसूरत दस्तक दी-‘पी लिया है सारा गम उसने समंदर की तरह, फिर भी जिन्दा है किसी मुर्दा सिकन्दर की तरह। आजकल है देश की सरकार जिनके हाथों में, झगड़ा करते हैं वो भी संसद में बन्दर की तरह। ‘आकुल’ने अपने मुक्तक से काव्य पाठ की शुरुआत की-‘हर ग़ज़ल मज़्मुआ मुझे दीवान लगता है,किताबों का हर सफ़्हा गीता कुरान लगता है। सुना है हर मुल्क में बसे हैं हिन्दुस्तानी, मुझे सारा संसार हिन्दुस्तान लगता है।‘सरकार पर कटाक्ष करते हुए अपने अगले मुक्तक में भी उन्होंनें दाद बटोरी-‘कुछ ऐसा करो उनकी शहादत खाली न जाये,हक़ की,रोटी की लड़ाई खाली न जाये। कोताही न बरतो सियासतदाँओं अब तो संज़ीदा बनो, छोड़ दो गद्दी अवाम जो सम्हाली न जाये। गोष्ठी में प्रमिला आर्य ने ‘भूल जा विगत को आज का सम्मान करके,बावरा मन है बीते दिन को याद करके,भूल जा अब उस विगत को आज का सम्मान करके सुनाई,अतिथि शायर बवंडर ने ‘हार पे हार सही है पर गम की कोई बात नहीं है, माना मुकद्दर भी जालिम है साथ नहीं है, मुझको डुबो सको लहरो तुम मे इतनी औक़ात नहीं है’ और शरद जायसवाल ने गीत होती है शाम जब भी दिल बैठने लगता है’।
गोष्ठी में डा0 नलिन, डा0 अशोक मेहता, उपासना मिश्रा, जनकवि डा0 मिश्रा ने भी काव्यपाठ किया। डा0 मिश्र के सुपुत्र सौरभ मिश्र ने अंत में सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।
रविवार, 9 सितंबर 2012
भारतेंदु हरिश्चन्द्र जयन्ति महोत्सव में विभिन्न राज्यों के साहित्यकार सम्मानित
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सम्मान समारोह में अध्यक्षता कर रहे जबलपुर के आचार्य श्री भगवत दुबे और मुख्य अतिथि आकाशवाणी दिल्ली के केंद्र निदेशक श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी |
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सम्मान प्रशस्ति पत्र, मोमेन्टो लिए पुष्पहार व शाल ओढ़े साहित्यकाऱ् |
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समारोह में उपस्थित श्रोतागण साहित्यकार |
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समारोह में उपस्थित श्रोतागण साहित्यकार |
दूसरे दिन 9 सितम्बर को सायं पाँच बजे शहर के बीचों बीच भारतेंदु समिति के वातानुकूलित हॉल में सैंकड़ों साहित्यकारों के बीच श्री भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के 162वें जन्मतिथि पर आयोजित भारतेंदु हरिश्चन्द्र जयन्ति महोत्सव में आमंत्रित साहित्यकारों को विभिन्न सम्मानों से नवाज़ा गया। साहित्यश्री, स्वरसुधा श्री,आचार्य हनुमान प्रसाद सक्सैना स्मृति सम्मान 2012 से कोटा नगर के साहित्यकारों सहित कोलकाता, दिल्ली, आसाम, आगरा, कानपुर, जबलपुर आदि से पधारे साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। सर्वप्रथम कोटा में
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स्वर सुधाश्री कोटा की सुश्री रेखा राव को |
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हनुमान प्रसाद सक्सैना स्मृति सम्मान
हैदराबाद के श्री नेहपाल वर्मा को |
भारतेंदु समिति के स्थापक की स्मृति में दिये जाने वाले हनुमान प्रसाद सक्सैना स्मृति सम्मान-2012 हैदराबाद के श्री नेहपाल वर्मा को दे कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात् संगीत के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाली एक नारी प्रतिभा को दिये जाने वाले पुरस्कार व सम्मान 'स्वर सुधाश्री' के लिए इस बार टी-वी- सीरियल 'बालिका वधु' के लिए टाइटल गीत 'छोटी सी उमर परणाई बाबो सा' और प्रख्यात मांड गीत 'केसरिया बालम आओ रे , पधारे म्हारे देस' एवं हाल ही आरंभ हुए सीरियल रामायण में भी रवींद्र जैन के साथ रामायण की चौपाइयाँ गाने वाली एवं सैंकड़ों राजस्थानी लोक गीतों के एलबम जिनके निकले हैं, कोटा की ही मशहूर गायिका 'सुश्री रेखा राव' को इस साल का यह सम्मान दिया गया। शेष सभी साहित्यकारों को 'साहित्यकार श्री' सेसम्मानित किया गया। सम्मान में पुष्प माला पहना कर प्रशस्ति पत्र,श्रीफल, शॉल और भारतेंदु हरिश्चंद्र के चित्र वाला मोमेंटो भेंट दिया गया। समारोह में आगरा के रामवीर शर्मा, कोटा के हितेश व्यास, कोटा के श्री प्रकाश नारायण मिश्र, हैदराबाद से ही आचार्य रत्नकला मिश्रा, गौहाटी असम से श्री चंद्रप्रकाश पौद्दार, दिल्ली से श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, कोटा के श्री भगवत सिंह जादौन मयंक, अटरूँ बारां, राजस्थान के श्री गोपाल नामेंद्र,जयपुर अवध विषादी,नई दिल्ली से श्रीमती ममता किरण, आगरा से डा0 रुचि चतुर्वेदी, नई दिल्ली से श्री आमेद कुमार, कोलकाता से कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, प्रोफेसर श्याम लाल उपाध्याय, जबलपुर से आचार्य भागवत दुबे आदि को सम्मानित किया गया।
बुधवार, 5 सितंबर 2012
सान्निध्य: शिक्षक
सान्निध्य: शिक्षक: जो शिक्षित करता हम उसको शिक्षक कह सकते हैं। जो दीक्षित करता हम उसको शिक्षक कह सकते है। दिशा दिखाये, दे दृष्टांत, आगाह करे,...
सोमवार, 3 सितंबर 2012
सान्निध्य का Favicon जारी
ब्लॉग 'सान्निध्य' ने अपना Favicon जारी किया है। यह लोगो 'सान्निध्य' के सभी ब्लॉग 'सान्निध्य', 'सान्निध्य सेतु', 'सान्निध्य दर्पण', 'सान्निध्य स्रोत' सब की लिंक पर दिखाई देगा। 'आकुल' ने बताया कि फेवआइकन ब्लॉग की एक पहचान है। विश्व के ब्लॉगर लोगोस में उसे शामिल किया जाता है।- सान्निध्य टीम
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