शनिवार, 11 जनवरी 2014

ई पत्रिका 'अनहद कृति' में रचना प्रकाशित

ई पत्रिका 'अनहद कृति' में रचना 'शिक्षा ऐसी हो' प्रकाशित। त्रैमासिक ई पत्रिका के 4 दिसम्‍बर 2013 के अंक में इस पत्रिका का अवलोकन करें और रचनाकारों को अपने विचार प्रेषित करें। रचना प्रकाशन के लिए अनहदकृति परिवार को आभार।  ई पत्रिका एक सशक्‍त पत्रिका हैं। साहित्यिक विचारोत्‍तेजक स्‍तम्‍भों स्‍मृति शेष साहित्‍याकारों की रचनायें, कवितायें, ग़ज़ल, हास्‍य व्‍यंग्‍य, नाटक, बाल साहित्‍य आदि विभिन्‍न विषयों पर रचनाओं का संकलन इस पत्रिका की विशेषतायें हैं। रचनाकार इससे जुड़ने के लिए अनहद कृति पर जायें और पंजीकऱण कर उससे जुड़ें। अपनी रचनायें ई पत्रिका में पहुँच कर ही भेजी जा सकती हैं।   

शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

डा0 रघुनाथ मिश्र के नये ग़ज़ल संग्रह 'प्राण पखेरू' का लोकार्पण 23 मार्च को साहित्यिक एवं सांस्‍कृतिक कला संगम अकादमी परियावाँ में


डा0 रघुनाथ मिश्र 'सहज'
गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल'
कोटा। कोटा के प्रख्‍यात वरिष्‍ठ जनवादी कवि डा0 रघुनाथ मिश्र 'स‍हज' के नये ग़ज़ल संग्रह 'प्राण पखेरू' का लोकार्पण साहित्यिक एवं सांस्‍कृतिक कलासंगम अकादमी, परियावाँ, जिला प्रतापगढ़ में 22-23 मार्च 2014 को अकादमी के भव्‍य समारोह में होना निश्चित हुआ है। अकादमी के संस्‍थापक एवं प्रबंधक डा0 वृन्‍दावन त्रिपाठी 'रत्‍नेश' ने दूरभाष पर डा0 मिश्र को अकादमी के समारोह में पुस्‍तक के की सहमति प्रदान कर दी है। इस कार्यक्रम में डा0 सहज के साथ   डा0 गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल' भी जायेंगे। प्रतिवर्ष होने वाले अकादमी के समारोह में भारत के अनेकों प्रान्‍तों के साहित्‍यकार, विद्वानों को आमंत्रित एवं सम्‍मानित किया जाता है। पूर्व में डा0 मिश्र व डा0 'आकुल' को अकादमी द्वारा सम्‍मानित किया जा चुका है। अकादमी में अन्‍य साहित्यिक संस्‍थायें भी सम्मिलित हो कर अपने कार्यक्रम करती हैं। जिनमें कोलकाता की भारतीय वाड्.मय पीठ, तारिका विचार मंच आदि कई संस्‍थायें भी साहित्‍यकारों को सम्‍मानित करती है। डा0  रघुनाथ मिश्र  'सहज' का यह दूसरा ग़ज़ल संग्रह है। पहला संग्रह 'सोच ले तू किधर जा रहा है' 2008 में जनवादी लेखक संघ, कोटा चेप्‍टर के 2008 में मनाये गये सृजन वर्ष में प्रकाशित हुआ था। डा0 मिश्र को इस पुस्‍तक पर ढेरों सम्‍मान व पुरस्‍कार प्राप्‍त हुए थे। डा0 'आकुल' ने डा0 'सहज' को बधाई दी। अखिल भारतीय स्‍तर पर अपनी जल्‍दी ही पहचान बनाने वाले डा0 मिश्र गीत, ग़ज़ल, हाइकु, दोहा ग़ज़ल, कविताएँ आदि के जाने माने हस्‍ताक्षर हैं। आपकी पुस्‍तक 'प्राण पखेरू' को क्लिक कर पूरा पढ़ें। 

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

सान्निध्य: आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल


सान्निध्य: आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल: 1- आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल उसको भी सम्‍मान से, करो विदा दे फूल करो विदा दे फूल, सीख लो जाते कल से तोड़ दिये यह भ्रम, बँध...

रविवार, 15 दिसंबर 2013

'आकुल' के लघुकथा संग्रह 'अब रामराज्‍य आएगा !!' का विमोचन उज्‍जैन में सम्‍पन्‍न

पुस्‍तक 'अब राम राज्‍य आएगा' !!' का विमोचन करते अतिथि मंचासीन अतिथिगण 
'आकुल' को 'भारतीय भाषा रत्‍न' से सम्‍मानित करते पीठ
के कुलाधिपति श्री सुमनभाई संत एवं प्रतिकुलपति
 'सहज' को 'विद्यासागर' से
सम्‍मानित करते प्रतिकुलपति
उज्‍जैन।14-12-2013। चक्रतीर्थ के नाम से प्रख्‍यात महाकाल की नगरी उज्‍जैन के प्रख्‍यात मौनतीर्थ आश्रम के चित्रकूट प्रांगण में आयोजित विक्र‍मशिला हिन्‍दी विद्यापीठ, ईशीपुर, गांधीनगर, भागलपुर बिहार के 18वें अधिवेशन में पूरे भारत से पधारे सैंकड़ों साहित्‍यकारों, विद्वानों के मध्‍य 'आकुल' की पुस्‍तक 'अब रामराज्‍य आएगा का लोकार्पण हुआ। कोटा राजस्‍थान से डा0 रघुनाथ मिश्र 'स‍हज' को विद्यासागर से सम्‍मानित किया गया। 'आकुल' को भी इस समारोह में 'भारतीय भाषा रत्‍न' से सम्‍मानित किया गया। 12 दिसम्‍बर से 14 दिसम्‍बर तक चले इस अधिवेशन में पूरे देश से पधारे साहित्‍यकारों को भारत गौरव, समाजसेवी रत्‍न, विद्या  वाचस्‍पति, साहित्‍य शिरोमणि, महाकवि आदि सम्‍मानों से सम्‍मानित किया गया। इस अधिवेशन में कई साहित्‍यकारों की स्‍वरचित, सम्‍पादित पुस्‍तकों, पत्र-पत्रिकाओं, शोधग्रंथों आदि का भी विमोचन किया गया। सम्‍मानस्‍वरूप उन्‍हें प्रशस्तिपत्र, पीठ की शोध पत्रिका 'पीठ वार्ता', आश्रम की पत्रिका मानस वंदन एवं स्‍वर्ण, रजत व ताम्र पदक प्रदान किये गये। 
पीठ के 18वें अधिवेशन में पूरे भारत से पधारे साहित्‍यकार
    

शनिवार, 7 दिसंबर 2013

एक और गाँधी चला गया

नेल्‍सन मंडेला 
जैसे ही समाचार मिला मंडेला नहीं रहे। सारी दुनिया स्‍तब्‍ध रह गयी। महात्‍मा गाँधी के आदर्श पर चले दक्षिण अफ्रीकी अश्‍वेत नेता का छवि वहाँ ही नहीं सारी दुनिया में दूसरे गाँधी की थी। इसीलिए उनसे प्रभावित हो कर हमने उन्‍हें भारत रत्‍न से अलंकृत किया था। बापू ने रंगभेद की अपनी यात्रा दक्षिण अफ्रीका से आरंभ की थी। और पूरे विश्‍व मे यह लड़ाई एक क्रांति लाई और विश्‍व का परिदृश्‍य बदल गया। 5 दिसम्‍बर 2013 को अपनी अनंत या्त्रा को रवाना हुए इस नेता ने अपना आदर्श दुनिया को दिया और जीने का नया मार्ग दिखलाया जिस पर आज शक्तिमान अमेरिका भी चल रहा है। उनके इस सम्‍मान को 1990 में भारत ने अपने सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान भारत रत्‍न से नवाज़ा। सत्‍य और अहिंसा का यह पुजारी 27 साल जेल में रह कर भी नहीं झुका। उनका आंदोलन जेल से भी प्रतिनिधित्‍व करता रहा। आज उनकी स्‍मृति शेष है किंतु वे आज दुनिया के हर एक दिलों में महात्‍मा की तरह ज़िन्‍दा हैं और हमेशा रहेंगे। बापू को राष्‍ट्रपिता का सम्‍मान मिला और मंडेला राष्‍ट्रपति पदस्‍थ हुए। उन्‍हें भावभीनी श्रद्धांजलि। 

शनिवार, 16 नवंबर 2013

सचिन की ऐतिहासिक विदाई


'सचिन' एक नाम, एक मान एक सम्‍मान एक कीर्तिमान। क़दम-क़दम पर जैसे कीर्तिमानों के फूल बिछे जा रहे हों। क्रिकिट में हर रन एक कीर्तिमान था उनका। अब उस दिन देखिए 14 नवम्‍बर 2013 का दिन। कीर्तिमान लिखने वाले शायद जानते हैं या नहीं लेकिन मैंने इस ऐतिहासिक कीर्तिमान का जोड़ ऐसे बैठाया है। शायद आपको भी अच्‍छा लगे। 14 नवम्‍बर को जब सचिन विदाई के आखिरी मैच में उतर रहे थे, उनके साथ एक कीर्तिमान चल रहा था। वे तब तक टेस्‍ट क्रिकिट में 15847 रन बना चुके थे। यही अंक एक कीर्तिमान बन गया। उनकी आज़ादी का, जिसके लिए आखिरी टेस्‍ट  शृंखला खेली जा रही थी। जी हाँ, इन अंकों को अलग करके देखें 15  8  47 यानि देश की आज़ादी का दिन 15 अगस्‍त '47। और इस क्रिकिट बाँकुरे का भी आज़ादी का दिन 15-8-47 यानि 15847 रन बनते ही तय हो गया। उसे मूर्तरूप दे दिया गया।
शानदारी 74 रन की ठोस शुरुआत दे कर भारत की जीत प्रशस्‍त करने में उनका योगदान भी ऐतिहासिक बन गया।
कहते हैं जब ऊपर वाला देता है तो छप्‍पर फाड़ कर देता है। और ऐसा ही हुआ। भारत के सर्वोच्‍च सम्‍मान 'भारत रत्‍न' के लिए भी खिलाड़ियों को सम्‍मान के रास्‍ते खुल गये। भले ही हॉकी के जादूगर ध्‍यानचंद भी इस दौड़ में शामिल हैं, किन्‍तु आज इस हर हिन्‍दुस्‍तानी के दिल की आवाज के आगे सत्‍ता ने भी सम्‍मान से सचिन को भारत रत्‍न की घोषणा कर एक अनोखा सम्‍मान दे दिया। अभूतपूर्व कृत्‍य करने वालों को ही तो दिया जाता है भारत रत्‍न। खेल में भले ही विज्ञापनों से आमदनी की अथाह बौछार होती है, किन्‍तु सचिन जैसे बेदाग खिलाड़ी कम ही होंगे।
सचिन को शुभकामनायें देने वाले करोड़ों लोगों में हम क्‍यों पीछे रहें। आइये इस कीर्तिपुरुष को सलाम करें।
सचिन अनोखा दे गए, एक और सम्‍मान।
घोषित भारत रत्‍न से, खुश है हिन्‍दुस्‍तान। 
खुश है हिन्‍दुस्‍तान, करोड़ों का दिल जीता।
तुमने किया कमाल, खेल को मिली सुभीता।
कह 'आकुल' कविराय, अनोखा लेखा जोखा।
पहला भारत रत्‍न, खिलाड़ी सचिन अनोखा।