ई पत्रिका 'अनहद कृति' में रचना 'शिक्षा ऐसी हो' प्रकाशित। त्रैमासिक ई पत्रिका के 4 दिसम्बर 2013 के अंक में इस पत्रिका का अवलोकन करें और रचनाकारों को अपने विचार प्रेषित करें। रचना प्रकाशन के लिए अनहदकृति परिवार को आभार। ई पत्रिका एक सशक्त पत्रिका हैं। साहित्यिक विचारोत्तेजक स्तम्भों स्मृति शेष साहित्याकारों की रचनायें, कवितायें, ग़ज़ल, हास्य व्यंग्य, नाटक, बाल साहित्य आदि विभिन्न विषयों पर रचनाओं का संकलन इस पत्रिका की विशेषतायें हैं। रचनाकार इससे जुड़ने के लिए अनहद कृति पर जायें और पंजीकऱण कर उससे जुड़ें। अपनी रचनायें ई पत्रिका में पहुँच कर ही भेजी जा सकती हैं।
शनिवार, 11 जनवरी 2014
शुक्रवार, 3 जनवरी 2014
डा0 रघुनाथ मिश्र के नये ग़ज़ल संग्रह 'प्राण पखेरू' का लोकार्पण 23 मार्च को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कला संगम अकादमी परियावाँ में
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| डा0 रघुनाथ मिश्र 'सहज' |
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| गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' |
मंगलवार, 31 दिसंबर 2013
सान्निध्य: आगत का स्वागत करो, विगत न जाओ भूल
सान्निध्य: आगत का स्वागत करो, विगत न जाओ भूल: 1- आगत का स्वागत करो, विगत न जाओ भूल उसको भी सम्मान से, करो विदा दे फूल करो विदा दे फूल, सीख लो जाते कल से तोड़ दिये यह भ्रम, बँध...
रविवार, 15 दिसंबर 2013
'आकुल' के लघुकथा संग्रह 'अब रामराज्य आएगा !!' का विमोचन उज्जैन में सम्पन्न
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| पुस्तक 'अब राम राज्य आएगा' !!' का विमोचन करते अतिथि मंचासीन अतिथिगण |
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| 'आकुल' को 'भारतीय भाषा रत्न' से सम्मानित करते पीठ के कुलाधिपति श्री सुमनभाई संत एवं प्रतिकुलपति |
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| 'सहज' को 'विद्यासागर' से सम्मानित करते प्रतिकुलपति |
| पीठ के 18वें अधिवेशन में पूरे भारत से पधारे साहित्यकार |
शनिवार, 7 दिसंबर 2013
एक और गाँधी चला गया
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| नेल्सन मंडेला |
गुरुवार, 5 दिसंबर 2013
शनिवार, 16 नवंबर 2013
सचिन की ऐतिहासिक विदाई
'सचिन' एक नाम, एक मान एक सम्मान एक कीर्तिमान। क़दम-क़दम पर जैसे कीर्तिमानों के फूल बिछे जा रहे हों। क्रिकिट में हर रन एक कीर्तिमान था उनका। अब उस दिन देखिए 14 नवम्बर 2013 का दिन। कीर्तिमान लिखने वाले शायद जानते हैं या नहीं लेकिन मैंने इस ऐतिहासिक कीर्तिमान का जोड़ ऐसे बैठाया है। शायद आपको भी अच्छा लगे। 14 नवम्बर को जब सचिन विदाई के आखिरी मैच में उतर रहे थे, उनके साथ एक कीर्तिमान चल रहा था। वे तब तक टेस्ट क्रिकिट में 15847 रन बना चुके थे। यही अंक एक कीर्तिमान बन गया। उनकी आज़ादी का, जिसके लिए आखिरी टेस्ट शृंखला खेली जा रही थी। जी हाँ, इन अंकों को अलग करके देखें 15 8 47 यानि देश की आज़ादी का दिन 15 अगस्त '47। और इस क्रिकिट बाँकुरे का भी आज़ादी का दिन 15-8-47 यानि 15847 रन बनते ही तय हो गया। उसे मूर्तरूप दे दिया गया।
शानदारी 74 रन की ठोस शुरुआत दे कर भारत की जीत प्रशस्त करने में उनका योगदान भी ऐतिहासिक बन गया।
कहते हैं जब ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। और ऐसा ही हुआ। भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' के लिए भी खिलाड़ियों को सम्मान के रास्ते खुल गये। भले ही हॉकी के जादूगर ध्यानचंद भी इस दौड़ में शामिल हैं, किन्तु आज इस हर हिन्दुस्तानी के दिल की आवाज के आगे सत्ता ने भी सम्मान से सचिन को भारत रत्न की घोषणा कर एक अनोखा सम्मान दे दिया। अभूतपूर्व कृत्य करने वालों को ही तो दिया जाता है भारत रत्न। खेल में भले ही विज्ञापनों से आमदनी की अथाह बौछार होती है, किन्तु सचिन जैसे बेदाग खिलाड़ी कम ही होंगे।
सचिन को शुभकामनायें देने वाले करोड़ों लोगों में हम क्यों पीछे रहें। आइये इस कीर्तिपुरुष को सलाम करें।
सचिन अनोखा दे गए, एक और सम्मान।
घोषित भारत रत्न से, खुश है हिन्दुस्तान।
खुश है हिन्दुस्तान, करोड़ों का दिल जीता।
तुमने किया कमाल, खेल को मिली सुभीता।
कह 'आकुल' कविराय, अनोखा लेखा जोखा।
पहला भारत रत्न, खिलाड़ी सचिन अनोखा।
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